Shikhar Samvad

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पेट्रोल डीजल की मार इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता बाजार

झारखंड में तेजी से बढ़ रही बैटरी चालित वाहनों की मांग, लेकिन चुनौतियां अब भी बरकरार…

पेट्रोल की मार से परेशान लोग अब अपना रहे बैटरी चालित वाहन

बाजार में बैटरी चालित स्कूटर और बाइक की जबरदस्त मांग, मगर चार्जिंग स्टेशन और बिजली संकट बना बड़ी रुकावट

झारखंड में बैटरी चालित वाहनों की बढ़ती रफ्तार के सामने चार्जिंग नेटवर्क पड़ा कमजोर, लंबी यात्रा अब भी चुनौती

रिपोर्ट :शुभम कुमार

रांची:पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डाला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन संकट और कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच अब लोग पारंपरिक वाहनों से दूरी बनाकर बैटरी चालित वाहनों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। झारखंड की राजधानी रांची समेत राज्य के कई शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन अब सिर्फ आधुनिकता का प्रतीक नहीं, बल्कि जरूरत बनते जा रहे हैं।


विशेषज्ञों की मानें तो बैटरी चालित वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा कारण कम खर्च है। पेट्रोल और डीजल की तुलना में इन वाहनों का प्रति किलोमीटर खर्च काफी कम होता है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिल रही है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों में बढ़ती जागरूकता भी एक बड़ी वजह बन रही है। खासकर युवा पीढ़ी अब ऐसे साधनों को प्राथमिकता दे रही है जो प्रदूषण कम करें और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं।


सरकार की ओर से भी बैटरी चालित वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। केंद्र सरकार की फेम योजना और राज्य सरकार की नई नीति के तहत खरीद पर सब्सिडी और टैक्स में राहत मिलने से लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि रांची के कई शोरूमों में लोकप्रिय बैटरी चालित स्कूटर और बाइक की भारी मांग देखी जा रही है। कई मॉडल तो लंबे समय तक ‘आउट ऑफ स्टॉक’ की स्थिति में बने हुए हैं।


हालांकि, मांग बढ़ने के बावजूद राज्य में चार्जिंग सुविधाओं की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। झारखंड में सीमित संख्या में ही चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं। जानकारी के अनुसार राज्य के केवल कुछ पेट्रोल पंपों पर ही चार्जिंग की सुविधा है और उनमें से भी कई मशीनें तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी रहती हैं।


इसके अलावा बिजली कटौती भी बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। रांची जैसे शहरों में लगातार होने वाले पावर कट के कारण बैटरी चालित वाहन उपयोगकर्ताओं को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं हाईवे और सार्वजनिक स्थानों पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन की कमी लंबी दूरी की यात्रा को मुश्किल बना रही है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य सरकार और निजी कंपनियां मिलकर चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करें, हाईवे पर फास्ट चार्जिंग कॉरिडोर तैयार किए जाएं और बैटरी स्वैपिंग जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए, तो झारखंड देश के प्रमुख हरित परिवहन राज्यों में शामिल हो सकता है।


जाहिर है कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने लोगों को नया विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है और आने वाला समय बैटरी चालित वाहनों का माना जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि सरकार, निजी कंपनियां और बिजली विभाग मिलकर मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार करें ताकि झारखंड भी हरित और आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।

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