रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में बुधवार से मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई। सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण की वैश्विक व्यवस्थाओं, तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल, मतदाता जागरूकता और निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की।
उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर समेत कई शिक्षाविद, शोधकर्ता और निर्वाचन विशेषज्ञ मौजूद रहे।
सम्मेलन पुस्तक और स्मारिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन पुस्तक एवं स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आईआईएम रांची, NUSRL रांची और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची नॉलेज पार्टनर की भूमिका निभा रहे हैं।
SIR से आगे व्यापक विमर्श का उद्देश्य
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से आगे बढ़कर मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श करना है।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए देशभर के 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया था। इसके बाद कुल 230 शोध सार (Abstracts) प्राप्त हुए। स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने इनमें से 80 सार को शॉर्टलिस्ट किया, जबकि अंतिम रूप से 58 शोध-पत्रों को प्रकाशन और विचार-विमर्श के लिए चुना गया।
दुनिया में बदल रही मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था
के. रवि कुमार ने विभिन्न देशों में अपनाई जा रही मतदाता पंजीकरण प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई जगह सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड रजिस्ट्रेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स और लगातार मतदाता सूची अपडेट करने जैसी व्यवस्थाओं का भी उपयोग बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में मतदाता सूची तैयार करने के लिए मजबूत संवैधानिक और कानूनी ढांचा मौजूद है। इसके साथ क्षेत्रीय सत्यापन और राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की जाती है। इसका उद्देश्य ऐसी शुद्ध और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है, जिसमें हर पात्र नागरिक का नाम शामिल हो और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में न रहे।
AI और तकनीक से मजबूत होगी मतदाता सूची
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारत मतदाता सूची प्रबंधन को और मजबूत बनाने के लिए तकनीक, डेटाबेस आधारित सत्यापन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का क्रमिक रूप से इस्तेमाल कर रहा है। इसके जरिए मतदाता रिकॉर्ड में मौजूद संभावित विसंगतियों की पहचान कर सूची की शुद्धता में सुधार किया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक के इस्तेमाल के साथ पूरी प्रक्रिया में क्षेत्रीय सत्यापन, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों की सहभागिता, न्यायिक समीक्षा तथा भारत निर्वाचन आयोग का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण भी बना रहता है।
निर्वाचन प्रबंधन में नई संभावनाओं के साथ चुनौतियां भी
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के साथ विश्वविद्यालय की साझेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को एक मंच पर लाने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव प्रक्रिया के संचालन के लिए व्यापक लॉजिस्टिक व्यवस्था और दक्ष पेशेवरों की आवश्यकता होती है। वहीं, उभरती तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से निर्वाचन प्रबंधन में नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने रखे विचार
उद्घाटन सत्र के बाद सम्मेलन के तकनीकी सत्र की शुरुआत हुई। इसकी अध्यक्षता बिहार के पूर्व डीजीपी डीएन गौतम ने की।
तकनीकी सत्र में बैंगलोर विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक प्रो. संदीप शास्त्री, दूरदर्शन नई दिल्ली के अतिरिक्त महानिदेशक चैतन्य प्रसाद, जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के इंटरनेशनल रिलेशन विभाग की प्रो. ईशानी नस्कर, IGNOU नई दिल्ली के राजनीतिक शास्त्र विभाग के सतीश कुमार सिंह, उत्कल विश्वविद्यालय ओडिशा की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा सारंगी, JNU के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महेश देबाता और IIIDEM नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय शर्मा समेत कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
दो दिवसीय सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के बीच विस्तृत चर्चा जारी रहेगी।