देवघर: झारखंड में पर्यटन को नई ऊंचाई देने की तैयारी शुरू हो गई है। धार्मिक पर्यटन के साथ अब इको टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में देवघर के प्रसिद्ध त्रिकुट पहाड़ को फिर से पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो गया है।

पर्यटन विभाग के मुताबिक, लंबे समय से बंद पड़े त्रिकुट रोपवे को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, इस बार रोपवे संचालन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। पूरी इंजीनियरिंग जांच और सभी जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही सेवा शुरू करने का फैसला लिया जाएगा।
सुरक्षा जांच के बाद ही शुरू होगा रोपवे
राज्य के पर्यटन निदेशक नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि त्रिकुट रोपवे को दोबारा शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछली घटना के बाद इस बार किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। उनके मुताबिक, रोपवे के तकनीकी पहलुओं और एलाइनमेंट की पूरी जांच की जाएगी। सभी सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के बाद ही इसके संचालन की अनुमति दी जाएगी। पर्यटन विभाग का लक्ष्य देवघर को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक और इको टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।
त्रिकुट और नंदन पहाड़ पर बढ़ेगा फोकस
देवघर को सिर्फ बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रखने की योजना है। इसके तहत त्रिकुट पहाड़, नंदन पहाड़ और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने पर काम किया जाएगा। इससे पर्यटकों को धार्मिक स्थलों के साथ प्राकृतिक पर्यटन का भी अनुभव मिल सकेगा। विभाग का मानना है कि इससे देवघर में पर्यटकों के ठहराव की अवधि और स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

लातेहार में ग्लास ब्रिज की भी तैयारी
पर्यटन विभाग की योजनाएं सिर्फ देवघर तक सीमित नहीं हैं। लातेहार, रामगढ़ और पतरातू को भी पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। लातेहार में राजगीर की तर्ज पर ग्लास ब्रिज विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे राज्य में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
रोपवे बंद होने से प्रभावित हुआ कारोबार
त्रिकुट रोपवे बंद होने से स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, त्रिकुट पहाड़ से जुड़े पर्यटन कारोबार से कई परिवारों की आजीविका चलती है। रोपवे बंद होने के बाद पर्यटकों की आवाजाही और स्थानीय व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।
पर्यटन बढ़ा तो रोजगार को भी मिलेगा फायदा
अगर त्रिकुट रोपवे को सुरक्षा मानकों के साथ दोबारा शुरू किया जाता है और प्रस्तावित पर्यटन परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो देवघर में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इससे होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार और अन्य पर्यटन आधारित कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।