रांची: ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में नेहा शिल्पी तिर्की ने गुरुवार को मांडर में बड़ी पहल की। मांडर प्रखंड परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वेजफेड के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों और प्राथमिक सहकारी समितियों के बीच गेहूं प्रसंस्करण मशीन एवं मिनी राइस मिल का वितरण किया गया। कार्यक्रम के तहत कुल 40 प्रसंस्करण इकाइयाँ लाभुकों को सौंपी गईं।

इसी मौके पर प्राकृतिक आपदाओं, वज्रपात, सड़क दुर्घटनाओं एवं अन्य विपदाओं से प्रभावित 65 लाभुकों के बीच कुल 17 लाख 24 हजार रुपये की सहायता राशि के चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ मशीनों का वितरण नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं तो परिवार, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तीनों मजबूत होते हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। कई किसान समूह जलाशयों में केज के माध्यम से मत्स्य पालन कर लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। इसके अलावा गाय, बकरी, मुर्गी और भेड़ पालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों की आमदनी के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकें। उन्होंने बताया कि कम पानी में होने वाली मड़ुवा (रागी) की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार प्रति एकड़ 3000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दे रही है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में किसान उठा रहे हैं।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को गांव स्तर तक पहुंचाने से स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की सुविधा मिलेगी। इससे उनकी आय बढ़ेगी, आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा और कृषि आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी। यह पहल विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही