रांची: वैश्विक ईंधन बाजार में जारी अस्थिरता का असर अब झारखंड में साफ दिखाई देने लगा है। राजधानी रांची समेत कई जिलों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत के बीच केंद्र सरकार द्वारा ईंधन और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस पूरे मामले को लेकर व्यापारिक संगठनों से लेकर सरकार के मंत्री तक चिंता जाहिर कर रहे हैं।
झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने राज्य में उत्पन्न हालात को गंभीर बताते हुए कहा है कि ईंधन संकट का सीधा असर कारोबार, उद्योग और परिवहन व्यवस्था पर पड़ रहा है।

चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि एक तरफ पेट्रोल-डीजल की कमी है, वहीं दूसरी ओर कीमतों में वृद्धि से महंगाई बढ़ना तय है। उन्होंने कहा कि डीजल की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों में जेनरेटर नहीं चल पा रहे हैं, जिससे उद्योगों का संचालन प्रभावित हो रहा है। परिवहन उद्योग पर भी इसका बड़ा असर पड़ रहा है। ऐसे में व्यवसायियों के सामने संचालन की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
चैंबर ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राज्य में पेट्रोल-डीजल की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करने और वैकल्पिक व्यवस्था पर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
इधर, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने भी राजधानी समेत कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है।
मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि कई पेट्रोल पंप ड्राई हो चुके हैं, जबकि कई जगहों पर लंबी कतारों के कारण अफरा-तफरी की स्थिति बन रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल संज्ञान लेने और पेट्रोल पंपों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है।
इरफान अंसारी ने कहा कि जनता की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को जरूरी निर्देश जारी करने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में कानून व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।