पूरे श्रावण माह तक लागू रहेगी व्यवस्था, सरकार ने सभी राज्यों, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट तक भेजा पत्र—VIP सिफारिश या आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक।
देवघर: श्रावण माह की शुरुआत के साथ ही विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और बेहतर व्यवस्था को देखते हुए झारखंड सरकार ने इस बार बड़ा फैसला लिया है। पूरे श्रावणी मेला 2026 के दौरान VIP दर्शन और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था पूरी तरह बंद रहेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम श्रद्धालुओं को बिना किसी भेदभाव के सुगमता से बाबा के दर्शन का अवसर मिल सके।

मंदिर प्रशासन ने इस वर्ष भी जलार्पण के लिए अर्घा सिस्टम लागू किया है, ताकि श्रद्धालुओं की लंबी कतारों का बेहतर प्रबंधन हो सके और दर्शन-पूजन की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संचालित हो।
ACS वंदना दादेल ने जारी किया आधिकारिक पत्र
कैबिनेट सचिवालय एवं निगरानी विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने इस संबंध में आधिकारिक पत्र जारी किया है। पत्र में कहा गया है कि बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है, जहां श्रावण माह के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकांश श्रद्धालु देवघर में दर्शन के बाद दुमका स्थित बाबा बासुकीनाथ मंदिर भी जाते हैं। ऐसे में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए VIP या आउट ऑफ टर्न दर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
सरकार ने की खास अपील
सरकार ने सभी मंत्रालयों, विभागों, संस्थानों और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि बाबा बैद्यनाथ धाम और बाबा बासुकीनाथ मंदिर में VIP दर्शन या विशेष प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार की अनुशंसा या सिफारिश राज्य सरकार या जिला प्रशासन को न भेजें।
देशभर के बड़े संस्थानों को भेजा गया पत्र
इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह पत्र भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल तथा देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी भेजा गया है। सरकार का कहना है कि इससे VIP सिफारिशों पर पूरी तरह रोक लगेगी और आम श्रद्धालुओं को निर्बाध एवं समान रूप से बाबा के दर्शन का अवसर मिलेगा।
श्रावणी मेला 2026 के दौरान सरकार का यह कदम भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।