नई दिल्ली: देश में 1 जुलाई से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण)’ (VB G-RAM-G) को लागू कर दिया है। इसके साथ ही नई मजदूरी दरें भी प्रभावी हो गई हैं।

मजदूरी में बढ़ोतरी
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, नई योजना के तहत राष्ट्रीय औसत दैनिक मजदूरी ₹298.80 से बढ़ाकर ₹327.40 कर दी गई है। वहीं, ₹300 प्रतिदिन की न्यूनतम आधार मजदूरी तय की गई है, ताकि किसी भी राज्य में मजदूरी इससे कम न हो। सरकार का दावा है कि इससे औसतन 10% से अधिक मजदूरी वृद्धि का लाभ मिलेगा।
कम मजदूरी वाले राज्यों को अधिक लाभ
नई मजदूरी संरचना में उन राज्यों को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले मजदूरी दरें अपेक्षाकृत कम थीं। सरकार के अनुसार बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। वहीं 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में दैनिक मजदूरी ₹300 या उससे अधिक हो गई है।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि नई योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को मजबूत करना, आय बढ़ाना और टिकाऊ ग्रामीण विकास को गति देना है। नई व्यवस्था के तहत रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का भी प्रावधान है।