नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट को पांच नए न्यायाधीश मिल गए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर पांच नामों को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक क्षमता बढ़ेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की है।
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के नए न्यायाधीश
नियुक्त किए गए न्यायाधीशों में विभिन्न हाईकोर्टों के चार मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। इनमें जस्टिस शील नागू, जस्टिस चन्द्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्तावी. सुब्रमणि मोहना का नाम शामिल है।
कॉलेजियम ने की थी सिफारिश
हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन पांच नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी। केंद्र सरकार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई, जिसके साथ ही इन नियुक्तियों पर औपचारिक मुहर लग गई।
न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
सुप्रीम कोर्ट में नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से सुनवाई की गति तेज होने की उम्मीद है। इससे आम लोगों को समय पर न्याय मिलने में भी मदद मिलेगी।
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सभी नव-नियुक्त न्यायाधीशों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सफल और प्रभावी कार्यकाल की कामना की है। वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से देश की शीर्ष अदालत की कार्यक्षमता और अधिक मजबूत होगी।