रांची: राज्य स्तरीय पंचायत सहायक संघ, झारखंड प्रदेश ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सोशल मीडिया पर एक विशेष अभियान चलाया। संघ के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रदीप कुमार के नेतृत्व में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक राज्यभर के पंचायत सहायकों ने फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और यूट्यूब समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी 8 सूत्री मांगों को सरकार और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाने का प्रयास किया।

संघ के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान सरकार को दिए गए लिखित समर्थन पत्र को भी व्यापक रूप से सोशल मीडिया पर साझा किया गया। अभियान के दौरान मुख्यमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, राज्य सरकार के अन्य मंत्री, विधायक, विभागीय अधिकारी तथा सत्तारूढ़ दलों के नेताओं को टैग कर पंचायत सहायकों की समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया गया।
पंचायत सहायकों की प्रमुख मांगें
संघ ने सरकार के समक्ष अपनी 8 सूत्री मांगों को दोहराते हुए कहा कि पंचायत सहायकों के हित में जल्द निर्णय लिया जाए। प्रमुख मांगों में प्रत्येक वर्ष ग्राम सभा से अनुमोदन की बाध्यता समाप्त करना, पंचायत सहायकों को ₹5000 अतिरिक्त मानदेय देने के वादे को लागू करना, प्रोत्साहन राशि के स्थान पर निश्चित मानदेय की व्यवस्था करना तथा कार्य के दौरान मृत पंचायत सहायकों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देना शामिल है।
इसके अलावा पंचायत सहायकों के लिए स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा की सुविधा, समस्याओं के समाधान हेतु राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग सेल का गठन, एक वर्ष से लंबित बकाया राशि का भुगतान तथा नगर निगम एवं नगर पंचायत क्षेत्रों में शामिल पंचायतों के सहायकों का समायोजन करने की मांग भी उठाई गई।
हजारों पंचायत सहायकों ने लिया हिस्सा
संघ का दावा है कि इस डिजिटल अभियान में राज्यभर के हजारों पंचायत सहायकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अभियान को सफल बनाने में प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रदीप कुमार, सचिव युगल किशोर प्रसाद, कोषाध्यक्ष बालगोविंद महतो, उपाध्यक्ष लवकुश प्रजापति, मंटू कुमार, रामनिवास तिवारी, गौतम कुमार कुशवाहा, राजेंद्र नायक, शमीम अख्तर, अब्दुर रसीद, बपी दा, गौतम पांडे, विभा रानी, सुनीता, बनिता, बबली समेत सभी जिलाध्यक्षों, प्रखंड अध्यक्षों और संगठन के अन्य पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संघ ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।