रांची: झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। चुनावी रण में बढ़त बनाने और विधायकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से सोमवार को रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में एनडीए विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर व्यापक रणनीति पर चर्चा हुई और गठबंधन के नेताओं ने एकजुटता का संदेश दिया।बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो, लोजपा (रामविलास) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र प्रधान तथा छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा समेत एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे। इसके अलावा राज्यसभा चुनाव में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में विधायक मंजू देवी, नीरा यादव, राज सिन्हा, सी.पी. सिंह, प्रदीप प्रसाद, उज्ज्वल दास, नवीन जायसवाल, सतेंद्र नाथ तिवारी सहित एनडीए के कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। नेताओं ने चुनाव के दौरान गठबंधन की मजबूती और मतदान के दिन की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
दो सीटों के लिए 18 जून को होगा मतदान
झारखंड में इस बार राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। एक सीट भाजपा नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हुई है, जबकि दूसरी सीट झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई है। दोनों सीटों के लिए 18 जून को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी।
परिमल नाथवानी पर NDA का दांव
राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने उद्योगपति और पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी को समर्थन दिया है। उनका नामांकन वैध पाए जाने के बाद चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। नाथवानी को लेकर एनडीए पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुका है और विधायकों के बीच लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है।
चुनावी गणित पर सबकी नजर
विधानसभा में संख्या बल के आधार पर सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, लेकिन राज्यसभा चुनाव की प्रकृति और संभावित क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच राजनीतिक दल कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। यही वजह है कि मतदान से पहले एनडीए और इंडिया गठबंधन दोनों अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति को धार देने में जुटे हुए हैं।
18 जून को होने वाला मतदान केवल दो राज्यसभा सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि झारखंड की बदलती राजनीतिक दिशा और दलों की संगठनात्मक ताकत की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। ऐसे में सभी की निगाहें अब चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।