रांची :झारखंड में बालू की किल्लत अब सिर्फ आम लोगों की परेशानी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि झारखंड में बालू अब सोने से भी ज्यादा कीमती हो गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति को एक रिसर्च टीम झारखंड भेजनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि आखिर यहां बालू सोना कैसे बन गई। बालू की कालाबाजारी, अवैध उठाव और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठा दी है।
झारखंड में बालू को लेकर मचे हाहाकार के बीच रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। रांची में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में बालू आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को या तो बालू मिल नहीं रही है और अगर मिल भी रही है तो ऊंची कीमत पर। संजय सेठ ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति को एक रिसर्च टीम झारखंड भेजनी चाहिए, ताकि दुनिया को पता चल सके कि आखिर यहां बालू सोना कैसे बन गई।
संजय सेठ ने आरोप लगाया कि जब-जब कांग्रेस के सहयोग से झारखंड में सरकार बनी है, तब-तब बालू की कालाबाजारी और अवैध कारोबार बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले कई घरों के लिए अब बिहार से बालू मंगानी पड़ रही है। उनका कहना है कि राज्य में बालू की भारी लूट चल रही है और इसका असर सीधे गरीबों और आम लोगों पर पड़ रहा है।

रक्षा राज्य मंत्री ने आरोप लगाया कि बालू के अवैध कारोबार में नीचे से ऊपर तक कमीशन का पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस खेल में कई सफेदपोश लोग शामिल हैं और रोजाना करोड़ों रुपये की अवैध वसूली हो रही है। संजय सेठ ने दावा किया कि कई स्थानीय अधिकारियों पर भी दबाव बनाया जाता है और पूरा तंत्र इस अवैध कारोबार से प्रभावित है।
संजय सेठ ने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके पास बालू कारोबार से जुड़े कई अहम इनपुट हैं। उन्होंने दावा किया कि जरूरत पड़ने पर वे जांच एजेंसियों को पूरी जानकारी उपलब्ध कराएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता जानना चाहती है कि बालू की लूट से फायदा किसे हो रहा है और आखिर इसका पैसा कहां तक पहुंच रहा है।
बालू संकट पर सियासत तेज हो गई है। एक ओर सरकार पर कालाबाजारी और अवैध उठाव के आरोप लग रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार हमलावर है। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और बालू संकट से राहत के लिए क्या कदम उठाती है।