रांची: जन्मजात हृदय रोग और दिल में छेद की समस्या से जूझ रहे बच्चों के लिए झारखंड में मेगा हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया जा रहा है। 29 अक्टूबर को लातेहार और 30 अक्टूबर को रांची स्थित रिम्स में बच्चों की जांच की जाएगी। इस कैंप में राज्य के विभिन्न जिलों से स्क्रीनिंग के जरिए चिन्हित करीब 1200 बच्चों की जांच विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम करेगी।
NHM ने सभी जिलों में स्क्रीनिंग तेज करने के दिए निर्देश
बच्चों की पहचान और स्क्रीनिंग को लेकर नामकुम स्थित NHM मुख्यालय में अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के अधिकारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा की। इस दौरान जिलों में अब तक हुई स्क्रीनिंग की जानकारी ली गई।
बोकारो में 76 बच्चों की स्क्रीनिंग होने पर उन्होंने टीम के प्रयास की सराहना की, जबकि चतरा में सिर्फ 10 बच्चों की प्रारंभिक पहचान पर नाराजगी जताई। उन्होंने सभी जिलों को कम से कम 50 ऐसे बच्चों की पहचान करने का निर्देश दिया, जो जन्म से ही दिल में छेद या किसी अन्य जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित हैं।
अभियान निदेशक ने कहा कि राज्य के हर जिले में ऐसे बच्चे मौजूद हैं, जिनका समय पर इलाज मिलने पर वे सामान्य जीवन जी सकते हैं। ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरकार अपने खर्च पर कराती है बच्चों का इलाज
जन्मजात हृदय रोग और दिल में छेद की समस्या का इलाज सर्जरी के जरिए संभव है। झारखंड सरकार का स्वास्थ्य विभाग ऐसे बच्चों की पहचान के बाद उनके इलाज का पूरा खर्च वहन करता है। बच्चों को इलाज के लिए केरल के कोच्चि स्थित अस्पताल भेजा जाता है।
NHM के अनुसार अब तक राज्य के विभिन्न जिलों के 260 बच्चों का सफल इलाज कराया जा चुका है। इलाज के बाद ये बच्चे स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। विभाग के मुताबिक प्रत्येक मरीज के इलाज पर सरकार करीब 10 लाख रुपये तक खर्च करती है।
इन जिलों में अब तक इतने बच्चों की पहचान
29 और 30 अक्टूबर को होने वाले मेगा हृदय हेल्थ कैंप के लिए कई जिलों में बच्चों की पहचान की जा चुकी है। इनमें बोकारो में 76, चतरा में 10, देवघर में 13, धनबाद में 17, दुमका में 24, लातेहार में 94, लोहरदगा में 35, पलामू में 29, गोड्डा में 15, हजारीबाग में 46 और सिमडेगा में 21 बच्चों की स्क्रीनिंग शामिल है।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक बच्चों की समय रहते पहचान कर उनका इलाज सुनिश्चित करना है, ताकि जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों को बेहतर और सामान्य जीवन मिल सके।