नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव से पहले बड़ा कानूनी झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं निर्धारित हो जाती हैं। अदालत ने कहा कि चुनाव संबंधी विवादों के निपटारे के लिए कानून में अलग व्यवस्था मौजूद है और चुनाव प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप करना न्यायसंगत नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से यह तर्क दिया गया कि जिस निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) के आधार पर उनका नामांकन पत्र खारिज किया गया, उस पर अब तक किसी सक्षम अदालत ने संज्ञान नहीं लिया है। ऐसे में नामांकन निरस्त करने की कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।
अदालत के फैसले के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रही अनिश्चितता समाप्त हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय मीनाक्षी नटराजन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि उन्हें तत्काल कोई राहत नहीं मिल सकी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें आमतौर पर सीधे हस्तक्षेप से बचती हैं और चुनावी विवादों के समाधान के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर जोर देती हैं।