Shikhar Samvad

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झारखंड कांग्रेस का चुनाव आयोग से लेकर सचिवालय तक सरकार पर हमला मंत्री के सम्मान के मुद्दे पर भी दिया साथ…

रांची: झारखंड कांग्रेस ने सोमवार को एक साथ तीन बड़े मुद्दों पर सरकार और प्रशासन के सामने अपनी बात रखी। कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता प्रदीप यादव ने मतदाता गहन पुनरीक्षण अभियान, सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर लगी रोक और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के साथ अधिकारियों के व्यवहार को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।

मतदाता गहन पुनरीक्षण पर 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर 29 जुलाई को समाप्त हो रही मतदाता गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया की समय-सीमा 15 दिन बढ़ाने की मांग की। के. राजू ने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष यह तर्क रखा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं का काम अभी अधूरा है। उनके अनुसार करीब 1 करोड़ मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म अभी तक नहीं भरे गए हैं, जबकि 35 लाख मतदाताओं की मैपिंग बाकी है। कांग्रेस ने वर्ष 2003 के चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्राम सभाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

सचिवालय में पत्रकारों की एंट्री पर उठाया सवाल

के. राजू ने झारखंड मंत्रालय (सचिवालय) में पत्रकारों के प्रवेश पर लगी रोक को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यदि पहले पत्रकारों को सचिवालय में प्रवेश की अनुमति थी, तो अब प्रतिबंध लगाने का कारण स्पष्ट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और कांग्रेस इस विषय को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएगी, ताकि पहले की व्यवस्था बहाल हो सके।

राधाकृष्ण किशोर के मुद्दे पर कांग्रेस का समर्थन

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा अधिकारियों के व्यवहार और मंत्रियों को मिलने वाले सम्मान का मुद्दा उठाए जाने पर भी कांग्रेस ने उनका समर्थन किया। के. राजू ने कहा कि यह केवल किसी एक मंत्री का नहीं, बल्कि पूरे मंत्रिमंडल की गरिमा का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि यदि मंत्रियों को उनके पद के अनुरूप सम्मान नहीं मिल रहा है, तो सरकार को अधिकारियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी राधाकृष्ण किशोर द्वारा उठाए गए मुद्दे के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।

कांग्रेस का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का अधिकार, मीडिया की स्वतंत्र भूमिका और जनप्रतिनिधियों का सम्मान—तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, इसलिए इन मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से कदम उठाना चाहिए।

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