रांची: झारखंड सरकार में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को लेकर राजनीति और तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने एक खुला पत्र जारी कर मंत्री से आत्मसम्मान के सवाल पर गंभीरता से सोचने की सलाह दी है। उनके पत्र के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच यह मुद्दा नई बहस का विषय बन गया है।

भानु प्रताप शाही ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार में यदि एक कैबिनेट मंत्री को अपनी बात मनवाने के लिए लगातार पत्र लिखने पड़ें और सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर करनी पड़े, तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मंत्री स्वयं को असहज महसूस कर रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और उसकी कार्यप्रणाली पर भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि मंत्री पद केवल अधिकार का नहीं बल्कि गरिमा का भी पद होता है। यदि उस गरिमा के अनुरूप परिस्थितियां नहीं बन रही हैं, तो व्यक्ति को अपने आत्मसम्मान के अनुरूप निर्णय लेने से पीछे नहीं हटना चाहिए। भाजपा नेता ने इसे केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे शासन तंत्र की कार्यशैली से जुड़ा मुद्दा बताया।

भानु प्रताप शाही ने अपने पत्र में पलामू की राजनीतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के नेताओं ने हमेशा सिद्धांतों और स्वाभिमान को प्राथमिकता दी है। उन्होंने पुराने राजनीतिक उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि कई नेताओं ने पद से अधिक अपने सम्मान और जनहित को महत्व दिया।
इधर, राधाकृष्ण किशोर पहले ही अधिकारियों के रवैये और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर चुके हैं। ऐसे में भाजपा के इस खुले पत्र ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।