AI, रोबोटिक्स, EV, सेमीकंडक्टर और साइबर सिक्योरिटी जैसे 32 नए कोर्स से बदलेगा ITI का स्वरूप
नई दिल्ली – देश में युवाओं को उद्योग की बदलती जरूरतों के मुताबिक तैयार करने और व्यावसायिक प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने की दिशा में PM-SETU ने एक साल पूरा कर लिया है। 4 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई इस योजना के तहत सरकारी आईटीआई को आधुनिक तकनीक, बेहतर बुनियादी ढांचे और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण से जोड़ने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
एक नजर में बड़ी बातें
- 850 आईटीआई की पहचान की गई है, जिनमें 172 हब और 678 स्पोक आईटीआई शामिल हैं।
- 14 आईटीआई क्लस्टरों के लिए ₹3,446 करोड़ की रणनीतिक निवेश योजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- देशभर में कुल 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिक बनाने का लक्ष्य है।
- 32 नए दौर के पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।
- AI, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स, EV, सेमीकंडक्टर, ड्रोन और 5G जैसे क्षेत्रों पर फोकस।
- भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना के 5 NSTI को मजबूत किया जा रहा है।
- सिंगापुर, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां की गई हैं।
- योजना का कुल परिव्यय ₹60,000 करोड़ है।
1,000 सरकारी आईटीआई होंगे आधुनिक
PM-SETU का मुख्य उद्देश्य देश के 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिक और उद्योग-अनुरूप प्रशिक्षण संस्थानों में बदलना है। इसके लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल अपनाया गया है। इसमें 200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई शामिल होंगे।
हब आईटीआई में आधुनिक प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लर्निंग सिस्टम, इनक्यूबेशन सुविधाएं, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और प्लेसमेंट जैसी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। वहीं, स्पोक आईटीआई इन आधुनिक संसाधनों और प्रशिक्षण सुविधाओं को आसपास के संस्थानों तक पहुंचाने में मदद करेंगे।
32 नए कोर्स से बदलेगा प्रशिक्षण का स्वरूप
बदलती तकनीक और रोजगार बाजार की जरूरतों को देखते हुए प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) ने 32 नए दौर के पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), सौर ऊर्जा, 5G और सॉफ्टवेयर टेस्टिंग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
इसका उद्देश्य युवाओं को पारंपरिक ट्रेड के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों से जुड़े रोजगार के लिए तैयार करना है।
14 क्लस्टरों के लिए ₹3,446 करोड़ की SIP मंजूर
PM-SETU के पहले वर्ष में 14 आईटीआई क्लस्टरों के लिए ₹3,446 करोड़ के निवेश वाली Strategic Investment Plans (SIP) को मंजूरी दी गई है।
योजना के तहत उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयोजन वाहन यानी SPV के जरिए उद्योग-नेतृत्व वाले शासन की व्यवस्था की गई है। प्रस्तावित व्यवस्था में एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत, जबकि केंद्र और राज्य सरकारों की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत होगी।
पांच NSTI को बनाया जाएगा उत्कृष्टता का केंद्र
योजना के दूसरे घटक के तहत भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना स्थित पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) की क्षमता बढ़ाई जा रही है।
इन संस्थानों में क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र विकसित करने और प्रशिक्षकों को उन्नत प्रशिक्षण देने पर जोर है।
विदेशों से भी जुड़ी कौशल साझेदारी
PM-SETU के तहत भारत के कौशल प्रशिक्षण को वैश्विक मानकों के करीब लाने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां की गई हैं।
NSTI चेन्नई के लिए सिंगापुर, NSTI कानपुर के लिए फ्रांस और NSTI भुवनेश्वर के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। वहीं, NSTI हैदराबाद के लिए जर्मनी के साथ संयुक्त आशय घोषणा का आदान-प्रदान हुआ है।
2014 से 2026 के बीच बढ़ा ITI नेटवर्क
देश में सरकारी और निजी आईटीआई की संख्या 2014 में 9,776 से बढ़कर 2026 में 13,888 हो गई है। यानी इस अवधि में आईटीआई की संख्या में करीब 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसी तरह आईटीआई में नामांकन भी शैक्षणिक सत्र 2014-15 में 9.51 लाख से बढ़कर 2025-26 में 14.70 लाख हो गया है।
राज्यों और उद्योगों की भी भागीदारी
PM-SETU को लागू करने में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अब तक 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने क्लस्टरों की पहचान कर ली है, जबकि 35 ने राज्य संचालन समितियों का गठन किया है।
वहीं, 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उद्योगों की भागीदारी आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रोजगार से सीधे जोड़ने पर जोर
PM-SETU का फोकस केवल आईटीआई के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है। योजना के जरिए प्रशिक्षण, उद्योग और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
आधुनिक प्रयोगशालाओं, नए दौर के पाठ्यक्रम, उद्योग की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के जरिए युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर, PM-SETU के जरिए देश के आईटीआई को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्रों से आगे ले जाकर तकनीक, उद्योग और रोजगार से जुड़े आधुनिक कौशल केंद्रों में बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है।
स्रोत्र – पीआईबी