नई दिल्त्ली –
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार अब सिर्फ सड़कों, पुलों और रेल लाइनों की लंबाई तक सीमित नहीं रह गया है। इसका सबसे बड़ा असर लोगों की यात्रा के समय में दिखाई दे रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बने नए पुल, सुरंगें, एक्सप्रेसवे और आधुनिक रेल सेवाएं लंबे सफर को छोटा कर रही हैं। कई ऐसे रूट हैं, जहां कभी यात्रियों को घंटों लगते थे, वहीं अब वही सफर काफी कम समय में पूरा हो रहा है।
पुलों ने बदली कनेक्टिविटी की तस्वीर
नदियों और भौगोलिक बाधाओं के कारण जिन इलाकों तक पहुंचने में लंबा समय लगता था, वहां नए पुलों ने सीधे संपर्क का रास्ता खोल दिया है।
भूपेन हज़ारिका सेतु, असम-अरुणाचल प्रदेश: रुपई से रोइंग की यात्रा का समय करीब 6 घंटे से घटकर 1 घंटे रह गया। यानी यात्रियों के करीब 5 घंटे बच रहे हैं।
बोगीबील पुल, असम: धेमाजी और डिब्रूगढ़ के बीच संपर्क में बड़ा बदलाव आया है। पहले जिस यात्रा में लगभग पूरा दिन लग जाता था, अब यह सफर करीब 1 से 2 घंटे में पूरा हो सकता है।
अटल सेतु, महाराष्ट्र: मुंबई और नवी मुंबई के बीच सीधा संपर्क मिलने से यात्रा का समय करीब 2 घंटे से घटकर 20 मिनट रह गया है।
कोसी रेल महासेतु, बिहार: निर्मली और सरायगढ़ के बीच रेल यात्रा का समय करीब 8 घंटे से घटकर सिर्फ 30 मिनट रह गया। रेल दूरी भी लगभग 300 किलोमीटर से घटकर 22 किलोमीटर हो गई।
सिसेरी नदी पुल, अरुणाचल प्रदेश: पासीघाट और रोइंग के बीच यात्रा में करीब 5 घंटे की बचत हो रही है।
सुरंगों ने पहाड़ों में बनाया सीधा रास्ता
पहाड़ी क्षेत्रों में घुमावदार और मुश्किल रास्तों के कारण यात्रा में काफी समय लगता था। सुरंगों ने इन इलाकों में दूरी और समय दोनों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अटल सुरंग, हिमाचल प्रदेश: 9.02 किलोमीटर लंबी सुरंग ने मनाली-सारचू मार्ग की दूरी करीब 46 किलोमीटर कम की है। इससे यात्रा में लगभग 4 से 5 घंटे की बचत होती है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग, जम्मू-कश्मीर: करीब 9 किलोमीटर लंबी यह सुरंग यात्रा की दूरी लगभग 30 किलोमीटर कम करती है और करीब 2 घंटे का समय बचाती है।
बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल: 8.45 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग से सड़क दूरी करीब 16 किलोमीटर कम हुई है और यात्रा में लगभग डेढ़ घंटे की बचत होती है।
सेला सुरंग, अरुणाचल प्रदेश: करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर बनी यह सुरंग तेजपुर-तवांग मार्ग पर हर मौसम में संपर्क सुविधा मजबूत करती है और यात्रा समय में एक घंटे से अधिक की कमी लाती है।
एक्सप्रेसवे ने लंबी सड़क यात्राओं को बनाया तेज
देश में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क बढ़ने से शहरों के बीच सड़क संपर्क पहले की तुलना में तेज और सुगम हुआ है। नियंत्रित प्रवेश और बेहतर सड़क डिजाइन के कारण लंबी दूरी की यात्रा में भी समय की बड़ी बचत हो रही है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे: 82 किलोमीटर लंबी परियोजना ने यात्रा का समय करीब 2.5 घंटे से घटाकर 50 मिनट कर दिया।
बेंगलुरु-मैसूरु एक्सप्रेसवे: 118 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे से सफर 3 घंटे से घटकर करीब 75 मिनट रह गया।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: 213 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय 6 घंटे से ज्यादा से घटाकर करीब 2.5 घंटे करने में मदद कर रहा है।
मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग: 701 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे ने दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को करीब 16 घंटे से घटाकर 8 घंटे के आसपास कर दिया है।
अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे: अहमदाबाद से धोलेरा की दूरी करीब 100 से घटकर 83 किलोमीटर और यात्रा का समय 2 घंटे 15 मिनट से घटकर करीब 45 मिनट रह गया है।
दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे: दिल्ली-अमृतसर यात्रा को 8 घंटे से 4 घंटे और दिल्ली-कटरा यात्रा को 14 घंटे से 6 घंटे तक लाने का लक्ष्य है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे: पूरी परियोजना के जरिए दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय करीब 33 घंटे से घटकर 12 घंटे होने की उम्मीद है।
रेलवे में भी बढ़ी रफ्तार
सड़क के साथ-साथ भारतीय रेलवे में भी यात्रा समय कम करने पर जोर दिया जा रहा है। 2026 की रेलवे समय-सारिणी में 549 ट्रेनों की गति बढ़ाई गई है। इनमें 20 ट्रेनें ऐसी हैं जिनकी यात्रा अवधि में 60 मिनट या उससे अधिक की कमी आई है।
वंदे भारत जैसी नई पीढ़ी की ट्रेनों ने कई रूटों पर सफर को और तेज किया है।
नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत: पुरानी सेवाओं की तुलना में करीब 40-50 प्रतिशत तेज।
कटरा-श्रीनगर वंदे भारत: यात्रा में करीब 2 से 3 घंटे की बचत।
बनारस-खजुराहो वंदे भारत: करीब 2 घंटे 40 मिनट की बचत।
एर्णाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत: यात्रा समय में 2 घंटे से ज्यादा की कमी।
लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत: करीब 1 घंटे की बचत।
हावड़ा-गुवाहाटी वंदे भारत स्लीपर: यात्रा का समय करीब 17 घंटे से घटकर 14 घंटे रह गया है।
बुलेट ट्रेन से करीब दो घंटे का सफर
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी भारत के परिवहन नेटवर्क में बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजनाओं में शामिल है। 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय सड़क मार्ग के करीब 8-9 घंटे से घटकर लगभग 1 घंटे 58 मिनट होने की उम्मीद है।
इस परियोजना में ठाणे क्रीक के नीचे करीब 7 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे रेल सुरंग भी शामिल है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब अब सिर्फ किलोमीटर नहीं
भारत में बन रहे नए परिवहन नेटवर्क का असर सिर्फ सड़क या रेल की लंबाई में नहीं मापा जा रहा है। असली बदलाव उस समय में दिखाई दे रहा है, जो यात्रियों को अपने सफर में बच रहा है। पुल बाधाओं को हटा रहे हैं, सुरंगें पहाड़ों को पार कर रही हैं, एक्सप्रेसवे लंबी दूरी को छोटा कर रहे हैं और तेज रफ्तार ट्रेनें यात्रा का समय घटा रही हैं। यानी बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ भारत में दूरी वही हो सकती है, लेकिन उसे तय करने में लगने वाला समय लगातार कम होता जा रहा है।
स्रोत्र – पीआईबी