नई दिल्ली: चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने बुधवार को नई दिल्ली में बैठक कर आगे की रणनीति तय की। बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद गठबंधन ने देशभर में ‘Save Democracy’ मार्च, चुनाव आयोग तक मार्च और अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां करने का कार्यक्रम घोषित किया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में जिला स्तर पर ‘Save Democracy’ मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। गठबंधन के नेता राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए भी समय मांगेंगे। अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना है। इनमें 1 नवंबर को दिल्ली में बड़ी रैली प्रस्तावित है। बाकी रैलियों की जगह और तारीख बाद में तय की जाएगी।
राहुल गांधी बोले- लोकतंत्र की रक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे
बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के सभी नेताओं ने लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठाए गए सवालों को जनता तक पहुंचाने में वह सफल रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी दल संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से काम करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में देश में बड़े बदलाव के लिए विपक्ष एक साथ काम करेगा।
खड़गे ने रखीं चुनाव सुधार से जुड़ी मांगें
मल्लिकार्जुन खड़गे ने भविष्य के चुनावों को लेकर कई मांगें सामने रखीं। इनमें SIR से पहले की मतदाता सूची के इस्तेमाल, मतदाता सूची में हर बदलाव की पूरी पारदर्शिता और किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले सूचना देने तथा अपील का प्रभावी अवसर देने की मांग शामिल है।
खड़गे ने चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर के इस्तेमाल की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार की प्रक्रिया में निर्वाचन क्षेत्र और बूथ स्तर तक पारदर्शिता होनी चाहिए।
CEC के इस्तीफे की मांग
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग को लेकर विपक्षी दलों के बीच गंभीर चिंताएं हैं।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी CEC के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने मतदाताओं के वोटिंग अधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। ये आरोप और मांगें विपक्षी नेताओं की ओर से रखी गई हैं।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
INDIA गठबंधन की यह बैठक उन रिपोर्टों के बाद हुई है, जिनमें चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर पिछले 10 महीनों में कई बार आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
इस मामले में चुनाव आयोग का कहना है कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी कहा है कि उसके सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं और उन्हें पूरी कानूनी मान्यता प्राप्त है।
किन दलों के नेता हुए शामिल?
बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, NCP (शरद पवार गुट), शिवसेना (UBT), RJD, CPM, CPI, नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP, झारखंड मुक्ति मोर्चा, CPI-ML, IUML, केरल कांग्रेस (एम), MDMK, VCK, RSP, केरल कांग्रेस (जोसेफ) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक समेत विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। राज्यसभा के निर्दलीय सांसद कपिल सिब्बल भी बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल तथा टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से हेमंत सोरेन ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया
INDIA गठबंधन का आगे का कार्यक्रम
गठबंधन की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘Save Democracy’ मार्च, 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक विपक्षी सांसदों का मार्च, राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगना और अक्टूबर-नवंबर में पांच बड़ी रैलियां प्रमुख कार्यक्रम होंगे। दिल्ली में 1 नवंबर को बड़ी रैली आयोजित करने की योजना है।
इस पूरी कवायद का केंद्र SIR, मतदाता सूची में बदलाव, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विपक्ष की मांगें हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों और चिंताओं के बीच अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी नियमों के अनुरूप बता चुका है।