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सिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों के इलाज को लेकर झारखंड में बड़ा फोकसडे केयर सेंटरों में एमबीबीएस डॉक्टरों की होगी उपलब्धता अट्ठाईस से…

सिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों के इलाज को लेकर झारखंड में बड़ा फोकसडे-केयर सेंटरों में MBBS डॉक्टरों की होगी उपलब्धता, 28 से 30 सितंबर तक जिलों में रक्तदान अभियान

रांची। झारखंड में सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और हीमोफिलिया जैसे गंभीर रक्त संबंधी रोगों से जूझ रहे मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। शुक्रवार को नामकुम स्थित लोक स्वास्थ्य संस्थान में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित कर इन मरीजों के इलाज, डे-केयर सेंटरों की व्यवस्था, रक्त की उपलब्धता और जागरूकता अभियान की समीक्षा की गई।बैठक में राज्य के सभी जिलों के अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, जिला आरसीएच पदाधिकारी, ब्लड बैंक प्रभारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक शामिल हुए। बैठक में सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया और हीमोफिलिया मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।डे-केयर सेंटरों में MBBS डॉक्टर की उपलब्धता के निर्देशराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में हीमोग्लोबिन पैथी और सिकल सेल मरीजों के लिए डे-केयर सेंटर संचालित हैं, वहां MBBS चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। खासकर बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के साथ-साथ मरीजों और उनके परिजनों की काउंसलिंग पर भी विशेष जोर देने को कहा गया।उन्होंने बताया कि जिलों में रक्त से संबंधित आवश्यक उपकरण, जिसमें ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर भी शामिल है, उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।28 से 30 सितंबर तक रक्तदान अभियानअभियान निदेशक ने कहा कि रक्त की कमी दूर करने का सबसे प्रभावी उपाय नियमित रक्तदान है। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि 28, 29 और 30 सितंबर को सभी जिलों में स्वैच्छिक रक्तदान अभियान आयोजित किया जाए और अधिक से अधिक रक्त संग्रह सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि एक व्यक्ति का रक्तदान किसी जरूरतमंद मरीज के लिए जीवन बचाने वाला साबित हो सकता है।CHC स्तर तक ब्लड स्टोरेज यूनिट की तैयारीस्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और ईमानदारी को प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे जरूरतमंद मरीजों को स्थानीय स्तर पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।उन्होंने भविष्य में रक्तदान व्यवस्था के और अधिक तकनीक आधारित और AI-enabled होने की संभावना की भी बात कही।RIMS में प्री-नेटल डायग्नोस्टिक सेवाओं की जानकारीबैठक में RIMS रांची के जेनेटिक विभाग की डॉ. अनुभा प्रसाद ने प्री-नेटल डायग्नोस्टिक से संबंधित उपलब्ध सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। सिकल सेल और अन्य आनुवंशिक रक्त विकारों की समय रहते पहचान और उचित परामर्श को मरीजों के बेहतर उपचार के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।बैठक में राज्य मुख्यालय के कोषांग पदाधिकारी एवं कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. पी.के. सिन्हा, डॉ. कमलेश कुमार सहित निदेशक एवं उपनिदेशक मौजूद रहे।अगर इसे शिखर संवाद के लिए और ज्यादा तेज, छोटी और मोबाइल-फ्रेंडली वेब कॉपी बनाना हो, तो इसकी हेडलाइन और 5 प्रमुख पॉइंटर इस तरह रखे जा सकते हैं:प्रमुख बिंदुसिकल सेल और थैलेसीमिया मरीजों को बेहतर इलाज देने की तैयारीडे-केयर सेंटरों में MBBS डॉक्टरों की उपलब्धता होगी सुनिश्चित28, 29 और 30 सितंबर को सभी जिलों में रक्तदान अभियानजिलों में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर समेत जरूरी उपकरण उपलब्ध होंगेCHC स्तर तक ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करने की तैयारी

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