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बिहार में बैंकिंग सेक्टर के ढीले रवैये पर वित्त विभाग सख्त सुधार नहीं करने वाले बैंकों के सरकारी डिपॉजिट पर लगेगी रोक उच्च…

पटना: बिहार सरकार के वित्त विभाग ने राज्य में बैंकिंग व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार के बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की अनुशंसाओं को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

विकास आयुक्त, बिहार मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समिति की बैठक में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार लाने के लिए पांच महत्वपूर्ण रणनीतिक अनुशंसाएं की गईं। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों की सख्त निगरानी की जाएगी तथा अगले छह महीनों में संतोषजनक सुधार नहीं होने पर उनके सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

उच्च स्तरीय समिति की प्रमुख अनुशंसाएं

  1. वार्षिक साख योजना (ACP) का लक्ष्य बढ़ाने की अनुशंसा
    समिति ने सुझाव दिया है कि राज्य का साख-जमा अनुपात (CD Ratio) बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष के संभावित जमा (Deposit) का न्यूनतम 80 प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित किया जाए।

इस दिशा में नाबार्ड द्वारा संशोधित Potential Linked Plan (PLP) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए ₹3,55,532 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। समिति ने इस आधार पर नई वार्षिक साख योजना तय करने के लिए राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) से अनुरोध करने की अनुशंसा की है।

  1. बड़े बैंकों को अधिक ऋण लक्ष्य देने का सुझाव
    समिति ने पाया कि यदि केवल SBI को छोड़कर अन्य बैंकों का CD Ratio निकाला जाए तो यह 68.16 प्रतिशत हो जाता है। वहीं SBI और PNB दोनों को छोड़ने पर यह बढ़कर 72.75 प्रतिशत हो जाता है।

इससे स्पष्ट है कि कई छोटे और मध्यम बैंक अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। समिति ने
सुझाव दिया है कि राज्य के CD Ratio में सुधार के लिए प्रमुख बैंकों को ACP के तहत अधिक ऋण लक्ष्य आवंटित किए जाएं।

  1. जनसमर्थ पोर्टल से सरकारी योजनाओं का एकीकरण
    समिति ने अनुशंसा की है कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सहित विभिन्न ऋण आधारित सरकारी योजनाओं को भारत सरकार के जनसमर्थ पोर्टल से जोड़ा जाए।

इस व्यवस्था से सभी बैंकों को सीधे आवेदन प्राप्त होंगे तथा योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन और ऋण वितरण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनेगी।

  1. पंचायत स्तर पर जनसमर्थ पोर्टल का व्यापक प्रचार
    समिति ने पंचायत स्तर पर आयोजित सहयोग शिविरों में जनसमर्थ पोर्टल के माध्यम से KCC आवेदन अपलोड करने के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की अनुशंसा की है।

इस पहल के तहत जीविका दीदियों, स्वयं सहायता समूहों तथा राज्य के लगभग 50 लाख किसानों को लक्षित किया जाएगा, जिनकी पहचान पहले से डिजिटल रूप से दर्ज की जा चुकी है।

  1. खराब प्रदर्शन वाले बैंकों पर कड़ी निगरानी
    समिति ने 100 अंकों के प्रदर्शन सूचकांक (Performance Measurement Index) के आधार पर बैंकों की रैंकिंग की समीक्षा की।

समिति के अनुसार:

जिन बैंकों का CD Ratio सुधार अत्यंत कम है और उपलब्धि 50 प्रतिशत से नीचे है, उन्हें निगरानी श्रेणी में रखा जाएगा। जिन बैंकों की ACP उपलब्धि 60 प्रतिशत से कम है, उनके प्रदर्शन की भी विशेष समीक्षा की जाएगी। अगले छह महीनों में सुधार नहीं होने पर ऐसे बैंकों के सरकारी डिपॉजिट पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

इस संबंध में वित्त विभाग के सचिव स्तर से संबंधित बैंकों को सुधार हेतु पत्र जारी किया जाएगा।
निगरानी में रखे जाने वाले प्रमुख बैंक

UCO Bank
Union Bank of India
Central Bank of India
Punjab National Bank (PNB)
Bank of India
State Bank of India (SBI)

IDBI Bank
Indian Overseas Bank
Bandhan Bank
Bank of Maharashtra
Karnataka Bank
Unity Small Finance Bank

IndusInd Bank
Utkarsh Small Finance Bank

Karur Vysya Bank

बैंकिंग सुधार के लिए गठित की गई है उच्च स्तरीय समिति

गौरतलब है कि बिहार सरकार के वित्त विभाग ने राज्य में बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा वित्तीय लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

यह निर्णय 22 जनवरी 2026 को माननीय उप मुख्यमंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की अध्यक्षता में आयोजित 95वीं त्रैमासिक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) की बैठक में लिया गया था।
समिति नियमित रूप से राज्य में वार्षिक साख योजना (ACP) के लक्ष्यों तथा CD Ratio की समीक्षा करेगी और आवश्यक सुधारात्मक कदमों के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगी।

समिति की संरचना
अध्यक्ष
विकास आयुक्त, बिहार
सदस्य

अपर मुख्य सचिव, वित्त विभाग, बिहार
निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)
मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड (NABARD)
मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI)

वित्त विभाग का स्पष्ट संदेश

बिहार सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में बैंकिंग क्षेत्र की जवाबदेही बढ़ाने, ऋण वितरण में सुधार लाने और आर्थिक विकास को गति देने के लिए अब प्रदर्शन आधारित निगरानी प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाएगा। खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों को सुधार का अवसर दिया जाएगा, लेकिन निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं होने पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

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