नई दिल्ली : टेंडर घोटाले से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए बेल दे दी। इसके साथ ही आलमगीर आलम करीब दो साल बाद जेल से बाहर आ सकेंगे।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश्वर और जस्टिस एन. कोटीश्वर सिंह की बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने आलमगीर आलम की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें राहत प्रदान की।
इससे पहले 11 जुलाई 2025 को झारखण्ड हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए उन्हें राहत देने से इनकार किया था। इसके बाद आलमगीर आलम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गौरतलब है कि पिछली झारखंड सरकार में मंत्री रहे आलमगीर आलम को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 15 मई 2024 को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, टेंडर घोटाले के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से खपाने का आरोप है।
ईडी की कार्रवाई के दौरान आलमगीर आलम के आप्त सचिव संजीव कुमार लाल और उनके नौकर जहांगीर आलम के ठिकानों से करीब 32.30 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद जांच एजेंसी ने आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। तब से वे न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थे। अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद झारखंड की राजनीति में इस मामले को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।