नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारत और यूनाइटेड अरब ईमिरेट्स के बीच एक अहम समझौते पर काम चल रहा है, जिसके तहत फुजैरा बंदरगाह के जरिए लाखों भारतीय कामगारों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसे दोनों देशों के मजबूत होते रणनीतिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को यूरोप दौरे पर रवाना होंगे। इस दौरान वह पहले फुजैरा पहुंचेंगे और वहां यूएई के साथ इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। इसके बाद उनका दौरा नीदरलैंड्स के लिए प्रस्तावित है। पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट के बीच यह दोनों देशों के बीच इस तरह का पहला बड़ा सुरक्षा एवं निकासी समझौता माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम एशिया में करीब एक करोड़ भारतीय कामगार रहते हैं, जिनमें से लगभग 43 लाख अकेले UAE में कार्यरत हैं। मौजूदा संघर्ष के कारण दुबई पोर्ट तक पहुंच प्रभावित हुई है, ऐसे में फुजैरा बंदरगाह अब एक वैकल्पिक और रणनीतिक मार्ग के रूप में उभरकर सामने आया है। यही वजह है कि भारत इस रूट को सुरक्षित निकासी और सप्लाई चैन दोनों के लिए महत्वपूर्ण मान रहा है।
इसके अलावा ‘खोर फक्कन’ बंदरगाह का भी इस्तेमाल सामान की ढुलाई के लिए किया जा रहा है, जहां से माल सड़क मार्ग के जरिए आगे भेजा जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी रणनीतिक महत्व के कारण ईरान ने फुजैरा क्षेत्र को निशाना बनाया है। ऐसे समय में पीएम मोदी की प्रस्तावित यात्रा को UAE के प्रति भारत के मजबूत समर्थन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के मजबूत होते संबंधों से भारत को ऊर्जा और व्यापार क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है। खासकर तब, जब UAE ने हाल ही में ओपेक जैसे प्रभावशाली तेल समूह से खुद को अलग किया है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब के साथ मतभेदों के चलते UAE ने यह फैसला लिया। ऐसे में भारत को कच्चे तेल पर लगने वाले ‘एशियाई प्रीमियम’ शुल्क से भी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।