Shikhar Samvad

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पीएम मोदी की प्रेरणा से बिहार में ग्रीन फ्राइडे सप्ताह में एक दिन छोड़ें निजी वाहन सार्वजनिक परिवहन ई वाहन और साइकिल को…

पैदल या साइकिल से ऑफिस आने वालों का होगा सम्मान

प्रधानमंत्री की अपील को बिहार में मिला बल

मंत्री दीपक प्रकाश ने कर्मचारियों से कहा—हर शुक्रवार अपनाएं ग्रीन ट्रांसपोर्ट

पटना: वैश्विक स्तर पर बढ़ते जलवायु संकट, पेट्रोलियम संसाधनों पर बढ़ती निर्भरता और प्रदूषण की गंभीर चुनौती के बीच बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे प्रत्येक शुक्रवार को कार्यालय आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, ई-वाहन, साइकिल या पैदल चलने को प्राथमिकता दें।

मंत्री ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार इस दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है।

जलवायु संकट के दौर में छोटी पहल, बड़ा असर

दीपक प्रकाश ने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, असामान्य मौसम, बढ़ते तापमान और प्रदूषण जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे समय में यदि प्रत्येक व्यक्ति सप्ताह में एक दिन निजी वाहन का उपयोग कम करे, तो ईंधन की बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि “एक दिन की यह आदत भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान हो सकती है।”

पैदल और साइकिल से आने वालों को मिलेगा सम्मान

मंत्री ने बताया कि जो कर्मचारी साइकिल या पैदल कार्यालय आएंगे, उनका विभाग की ओर से स्वागत और प्रोत्साहन किया जाएगा। इससे कर्मचारियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और फिट जीवनशैली को भी बढ़ावा मिलेगा।

स्वास्थ्य संबंधी मामलों में छूट

मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो कर्मचारी शारीरिक रूप से अस्वस्थ हैं या विशेष परिस्थितियों में हैं, वे अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुरूप यात्रा के साधन चुन सकते हैं।

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल

पंचायती राज विभाग की यह पहल केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। यदि अन्य विभाग और आम नागरिक भी इस पहल को अपनाते हैं, तो यह बिहार को हरित और स्वच्छ बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो सकता है।

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