NAAC के नए नियमों पर एमिटी यूनिवर्सिटी में फैकल्टी की खास क्लास, AI से होगी मान्यता की जांच!
NAAC के नए नियमों पर एमिटी यूनिवर्सिटी में फैकल्टी की बड़ी वर्कशॉप
NAAC के नए नियमों पर एमिटी यूनिवर्सिटी में फैकल्टी की बड़ी वर्कशॉप
अब AI करेगा कॉलेजों की गुणवत्ता की जांच, एमिटी में शिक्षकों को मिली ट्रेनिंग
OBE और Accreditation Excellence पर एमिटी यूनिवर्सिटी की खास पहल
नई NAAC नीति को समझने के लिए एमिटी में फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप
ग्लोबल एक्सीलेंस की तैयारी में जुटी एमिटी यूनिवर्सिटी, शिक्षकों को दिया विशेष प्रशिक्षण
रांची, एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड ने शिक्षकों को नई शिक्षा व्यवस्था और प्रत्यायन (Accreditation) के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ‘Faculty Readiness Workshop: Course Files, OBE Mapping, Amizone & Accreditation Excellence’ विषय पर प्रथम फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप का आयोजन किया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक के. श्रीवास्तव ने कहा कि 10 फरवरी 2025 को NAAC ने अपनी प्रत्यायन प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब पुरानी CGPA आधारित A++ से C ग्रेडिंग की जगह दो-स्तरीय (Two-Tier) Accreditation Model लागू किया गया है।

नई व्यवस्था के तहत Tier-A में AI आधारित दस्तावेज़ सत्यापन होगा और संस्थानों को केवल “Accredited” या “Not Accredited” का दर्जा मिलेगा। वहीं Tier-B में संस्थानों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर Level-1 (Basic Compliance) से Level-5 (Global Excellence) तक रेटिंग दी जाएगी।
कार्यशाला के पहले सत्र में डॉ. टी. रमेश, पूर्व प्रोफेसर, NIT वारंगल ने Outcome-Based Education (OBE), Bloom’s Taxonomy, Teaching-Learning Process, Documentation और Accreditation Framework पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए OBE प्रणाली बेहद महत्वपूर्ण है।

दूसरे सत्र में डॉ. प्रदीप कुमार यादव, नियंत्रक परीक्षा, स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ ने Course Outcomes (COs), Program Outcomes (POs), Program Educational Outcomes (PEOs) और Program Specific Outcomes (PSOs) की प्रभावी मैपिंग और Attainment प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया।
इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को नई NAAC प्रणाली, Outcome-Based Education और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करना था, ताकि विश्वविद्यालय भविष्य की प्रत्यायन और रैंकिंग प्रक्रियाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सके।