मोतिहारी: नेपाल में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच रक्षाबंधन की तैयारियां तेज हो गई हैं। भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में इस बार भी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाने की तैयारी है। खुली सीमा के कारण नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली कई बहनें बिहार आकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी।

भारत-नेपाल सीमा सिर्फ सरहद नहीं, रिश्तों की भी कड़ी
भारत और नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक रिश्ते हैं। खासकर बिहार के सीमावर्ती जिलों और नेपाल के पर्सा व बारा जैसे इलाकों के बीच पारिवारिक एवं वैवाहिक संबंध काफी गहरे हैं।
रक्षाबंधन के मौके पर आम दिनों की तुलना में सीमा पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। नेपाल में रहने वाली बहनें अपने भाइयों के घर पहुंचती हैं और राखी बांधकर परिवार के साथ त्योहार की खुशियां साझा करती हैं।
कोरोना के बाद फिर सामान्य हुई आवाजाही
कोरोना महामारी के दौरान भारत-नेपाल सीमा पर करीब दो वर्षों तक लोगों की आवाजाही प्रभावित रही थी। उस दौरान कई भाई-बहन रक्षाबंधन के मौके पर एक-दूसरे से नहीं मिल सके थे।
अब स्थिति सामान्य होने के बाद दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही फिर पहले की तरह हो गई है। यही वजह है कि इस बार सीमावर्ती इलाकों में रक्षाबंधन को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है।
नेपाल में बाढ़ की चुनौती, फिर भी पर्व की तैयारी
इस बार नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से सतर्कता बरती जा रही है।
ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद सीमावर्ती इलाकों में लोग सावधानी के साथ रक्षाबंधन की तैयारियों में जुटे हैं।
सीमा पर आवाजाही को लेकर विशेष प्रतिबंध नहीं
बाढ़ की स्थिति के बावजूद सीमावर्ती इलाकों में भारत-नेपाल के बीच सामान्य आवाजाही जारी रहने की जानकारी है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद लोग सीमा पार आ-जा रहे हैं। हालांकि, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है।
राखी के धागे से मजबूत होंगे रिश्ते
रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का त्योहार नहीं है, बल्कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की भी झलक दिखाता है।
नेपाल में बाढ़ की मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी राखी का यह त्योहार दोनों देशों के परिवारों को जोड़ने का काम करेगा। सीमा के आर-पार भाई-बहनों के मिलन के साथ एक बार फिर प्यार, विश्वास और रिश्तों की गर्माहट देखने को मिलेगी।