Shikhar Samvad

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पीएम मोदी ने सेवा संकल्प अभियान के सेवा यात्रियों से की बातचीत पारंपरिक जल संरक्षण और पौधारोपण पर दिया जोर…

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘सेवा यात्रा’ में शामिल प्रतिभागियों से वर्चुअली बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक जल संरक्षण के तरीकों और यात्रा के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की।

इस अभियान के तहत 10 समूह गुजरात के वडनगर से वाराणसी तक बाइक यात्रा कर रहे हैं। 17 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाली इस यात्रा का उद्देश्य सेवा, जनसंपर्क, युवा भागीदारी, समाज कल्याण और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए लोगों को जोड़ना है।

जालोर में बच्चों ने लिया पौधों की देखभाल का संकल्प

बातचीत के दौरान एक प्रतिभागी ने जालोर की ‘सेवा वाटिका’ का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पौधारोपण अभियान से प्रभावित होकर स्थानीय बच्चों ने हर रविवार पौधों को पानी देने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए राजस्थान जैसे सूखे क्षेत्रों में पौधों को पानी देने के लिए पारंपरिक तरीका अपनाने का सुझाव दिया।

मिट्टी के घड़े से पौधों की सिंचाई का सुझाव

पीएम मोदी ने कहा कि पौधे के पास मिट्टी का छिद्रयुक्त घड़ा गाड़कर उसमें पानी भरा जा सकता है। मिट्टी के घड़े से पानी धीरे-धीरे रिसकर पौधे की जड़ों तक पहुंचता रहेगा। उन्होंने बताया कि महीने में एक बार घड़ा भरने से पानी की बचत हो सकती है और पौधों को लगातार नमी मिल सकती है।

उन्होंने लोगों से इस पारंपरिक तरीके को विशेष रूप से राजस्थान जैसे कम पानी वाले क्षेत्रों में साझा करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मिट्टी के गमले में अतिरिक्त छेद करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि टेराकोटा की प्राकृतिक जल रिसाव क्षमता पर्याप्त हो सकती है।

सेवा यात्रियों की गतिविधियां

सेवा यात्रा में शामिल प्रतिभागी विभिन्न कस्बों, जिलों और गांवों में लोगों से संवाद कर रहे हैं तथा स्थानीय जरूरतों के अनुसार सेवा कार्य कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:

• तालाबों, मंदिरों, स्कूलों और पार्कों में सफाई अभियान।
• अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर सेवा गतिविधियां।
• युवाओं से संवाद और ग्राम सभा चर्चा।
• गौ सेवा और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण।
• स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी जरूरतों को समझना।

प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा यात्रियों का वाराणसी में स्वागत करते हुए उन्हें काशी की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय खान-पान का आनंद लेने की सलाह दी। साथ ही, लंबी यात्रा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने संतुलित भोजन करने की बात भी कही।

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