बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में उद्योग विभाग और देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों के बीच करीब 51,600 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित होंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

सबसे बड़ा निवेश 22,500 करोड़ रुपये का न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में प्रस्तावित है, जबकि स्टील सेक्टर में कई कंपनियों ने हजारों करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है। सरकार का लक्ष्य बिहार को देश का प्रमुख स्टील हब बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टील और मेटल उद्योगों के साथ-साथ टेक्सटाइल, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी, फूड प्रोसेसिंग और फार्मा सेक्टर को भी विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रम आधारित टेक्सटाइल उद्योग राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकता है, वहीं फूड प्रोसेसिंग उद्योग किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने Bihar Business Connect 2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की और कहा कि इसका उद्देश्य देश-विदेश के निवेशकों को बिहार में उपलब्ध अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने “Build and Believe in Bihar” को राज्य के औद्योगिक विकास का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि निवेशकों का विश्वास जीतकर परियोजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारा जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि MoU केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को मिशन मोड में पूरा किया जाए, ताकि बिहार में निवेश, उत्पादन और रोजगार को नई गति मिल सके।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।