भारत समुद्री बीमा पूल से मजबूत हुई समुद्री संप्रभुता, जहाजों और कार्गो को घरेलू बीमा सुरक्षा
भारत के समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP) महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। मई 2026 में शुरू किए गए इस पूल के जरिए भारतीय जहाजों, कार्गो और समुद्री गतिविधियों से जुड़े विभिन्न जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवर उपलब्ध कराया जा रहा है। पूल की कुल जोखिम-अंकन क्षमता 13,906.50 करोड़ रुपये (1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जिसमें 12,980 करोड़ रुपये (1.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की सरकारी गारंटी शामिल है।
भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। ऐसे में समुद्री बीमा को देश की व्यापारिक और ऊर्जा सुरक्षा की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। BMIP का उद्देश्य विदेशी बीमा और पुनर्बीमा संस्थाओं पर निर्भरता कम करते हुए भारत में ही समुद्री जोखिमों के लिए मजबूत बीमा क्षमता विकसित करना है।
समुद्री व्यापार के लिए क्यों जरूरी है BMIP
भारत के व्यापार मूल्य का करीब 95 प्रतिशत और व्यापार मात्रा का लगभग 70 प्रतिशत समुद्री मार्गों से संचालित होता है। वर्ष 2025-26 में देश के बड़े और छोटे बंदरगाहों ने करीब 1,668 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो संभाला।
भारत के पास करीब 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, 12 बड़े और 217 छोटे बंदरगाह तथा 14,500 किलोमीटर से अधिक अंतर्देशीय जलमार्ग हैं। समुद्री क्षेत्र से जुड़े रोजगार भी करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार हैं।
विदेशी बीमा पर निर्भरता घटाने की कोशिश
अब तक भारतीय जहाज मालिक समुद्री बीमा, विशेषकर पी एंड आई कवर के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी क्लबों पर निर्भर रहे हैं। इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब्स के 13 प्रमुख क्लब दुनिया के बड़े जहाजों के अधिकांश हिस्से का बीमा करते हैं।
लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच युद्ध जोखिम बीमा की लागत में भी बदलाव आया। ऐसे समय में घरेलू बीमा क्षमता को मजबूत करने से भारतीय जहाज मालिकों और आयात-निर्यात कारोबार को वैकल्पिक सुरक्षा मिलती है।
BMIP में किन जोखिमों का बीमा
भारत समुद्री बीमा पूल के तहत समुद्री क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख जोखिमों को कवर किया जाता है।
- जहाज का ढांचा और मशीनरी: जहाज के मुख्य ढांचे, प्रोपल्शन सिस्टम और उपकरणों को होने वाले नुकसान का कवर।
- कार्गो युद्ध जोखिम: संघर्ष या अन्य उच्च जोखिम वाले समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले माल को सुरक्षा।
- संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति (P&I): प्रदूषण, मलबा हटाने, चालक दल की दुर्घटना और अन्य देनदारियों से जुड़ा कवर।
- युद्ध जोखिम: सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जे जैसे जोखिमों के खिलाफ सुरक्षा।
कौन से जहाज पात्र हैं
BMIP के तहत भारतीय ध्वज वाले जहाजों के अलावा ऐसे जहाज भी पात्र हैं जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। भारत से शुरू होने वाले या भारत आने वाले मालवाहक जहाजों को भी निर्धारित पात्रता के अनुसार कवर मिल सकता है।
पूल की अवधि 10 वर्ष रखी गई है, जिसे 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
दावा निपटान की व्यवस्था
BMIP में 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान संचित आरक्षित निधि और पुनर्बीमा वसूली के जरिए किया जाता है। बड़े दावों की स्थिति में आरक्षित कोष समाप्त होने के बाद सरकारी संप्रभु गारंटी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पूल की पॉलिसियां सदस्य घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं, जबकि जोखिम को पूल के सदस्यों के बीच उनकी प्रतिबद्ध क्षमता के अनुपात में साझा किया जाता है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC) पूल मैनेजर के रूप में इसके रोजमर्रा के संचालन को संभालता है।
शुरुआत के बाद क्या हासिल हुआ
7 सितंबर 2026 तक BMIP के तहत 3,000 कार्गो युद्ध जोखिम, 92 जहाज ढांचा एवं मशीनरी युद्ध जोखिम और 3 पी एंड आई बीमा पॉलिसियां जारी की जा चुकी थीं।
30 जुलाई 2026 को BMIP के तहत भारत की पहली पी एंड आई पॉलिसी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को जारी की गई। इसे द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने जारी किया था।
12 मई 2026 को संघर्ष क्षेत्र से गुजरने वाले एक जहाज के लिए पूल की पहली पॉलिसी जारी की गई थी। इसके अलावा भारत आने वाले सामान और समुद्री मार्ग से माल का कारोबार करने वाली कंपनियों को भी BMIP के तहत कवर दिया गया है।
आगे की राह
BMIP का फोकस भारत में समुद्री जोखिम मूल्यांकन, दावों के प्रबंधन, पुनर्बीमा और विशेषज्ञ मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाने पर है। लंबे समय में इसका उद्देश्य भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री बीमा के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करना है।
घरेलू समुद्री बीमा क्षमता बढ़ने से भारतीय जहाजों और कार्गो के लिए वैश्विक संकट के समय बीमा कवर की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यह भारत की बढ़ती समुद्री अर्थव्यवस्था, जहाजरानी और बंदरगाह क्षेत्र के लिए एक घरेलू वित्तीय सुरक्षा तंत्र तैयार करता है।
स्रोत्र – पीआईबी