रांची/खूंटी: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर अंतर्गत कृषि प्रणाली का पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची द्वारा WCSF चैरिटी स्पिरिट फाउंडेशन के सहयोग से खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड स्थित चांपी गांव में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत जागरूकता एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और टिकाऊ कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।कार्यक्रम का समन्वयन केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वी.के. यादव और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रेशमा शिंदे ने अपनी टीम के साथ किया। इस कार्यक्रम में कुल 172 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 87 महिलाएं और 85 पुरुष शामिल रहे।
तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. वी.के. यादव ने दलहनी फसलों, विशेषकर सब्जी सोयाबीन की खेती के लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दलहनी फसलें मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और खेती की लागत घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वहीं डॉ. रेशमा शिंदे ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट और अन्य जैविक खाद तैयार करने की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। उन्होंने धान की खेती में अजोला के उपयोग का भी प्रदर्शन किया और बताया कि यह रासायनिक उर्वरकों का प्रभावी एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प साबित हो सकता है।
कार्यक्रम के समापन पर किसानों के बीच सब्जी सोयाबीन के बीज तथा सूखा सहनशील धान की उन्नत किस्मों का वितरण किया गया। वैज्ञानिकों ने किसानों से आधुनिक वैज्ञानिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे उत्पादन बढ़ेगा, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।