रांची: झारखंड में होमगार्ड जवानों के लंबित मानदेय का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तैनात महिला होमगार्ड की दर्दभरी गुहार—”पैसा दिला दीजिए, नहीं तो मर जाएंगे”—के सामने आने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने दावा किया है कि सरकार ने मानदेय भुगतान के लिए 65 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं और जल्द सभी जवानों को बकाया राशि मिल जाएगी।

MGM अस्पताल में तैनात होमगार्ड आर्थिक संकट से जूझ रहे
जानकारी के अनुसार, MGM मेडिकल कॉलेज अस्पताल की सुरक्षा में तैनात करीब 135 होमगार्ड जवान कई महीनों से मानदेय नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। कुछ जवानों का चार से पांच महीने का, जबकि कई का 16 महीने तक का मानदेय लंबित बताया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है।
BJP ने सरकार पर साधा निशाना
इस मुद्दे पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड में व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के करीब 3000 होमगार्ड जवानों को समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि सरकार बड़ी-बड़ी योजनाओं और दावों की बात करती है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले होमगार्ड जवानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
कांग्रेस ने दिया जवाब
वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। पार्टी का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर सरकार ने 65 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं और जल्द ही होमगार्ड जवानों के लंबित मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा। कांग्रेस ने भरोसा दिलाया कि सरकार किसी भी कर्मचारी का बकाया रोकने के पक्ष में नहीं है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच जवानों को भुगतान का इंतजार
होमगार्ड जवानों के मानदेय का मुद्दा अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है। एक ओर विपक्ष सरकार को घेर रहा है, तो दूसरी ओर सरकार जल्द भुगतान का भरोसा दे रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे होमगार्ड जवानों के खाते में उनका बकाया मानदेय आखिर कब तक पहुंचेगा।