रांची: त्योहारों के मौसम में सब्जियों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। प्याज पहले से ही 50 रुपये प्रति किलो के पार बिक रहा है, वहीं अब टमाटर समेत लगभग सभी हरी सब्जियों के दाम में तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में कई सब्जियां 50 रुपये प्रति किलो से अधिक कीमत पर मिल रही हैं। महंगाई से परेशान लोग अब राजमा और सोयाबीन जैसे विकल्पों का सहारा लेने लगे हैं।
बारिश और ढुलाई का खर्च बढ़ने से महंगी हुईं सब्जियां
सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे लगातार बारिश और परिवहन खर्च में इजाफे को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बारिश के कारण झारखंड के कई इलाकों में सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इससे बाजार में स्थानीय सब्जियों की आवक प्रभावित हुई है। वहीं, बाहर से सब्जियां मंगाने का खर्च बढ़ने से भी कीमतों पर असर पड़ा है।
व्यापारियों के अनुसार, कई सब्जियों के दाम में 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। नई फसल बाजार में आने के बाद ही कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
100 रुपये में नहीं भर रहा सब्जियों का थैला
सब्जियों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम परिवारों की रसोई पर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि आमदनी में बढ़ोतरी नहीं हुई है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के साथ सब्जियां भी महंगी हो गई हैं। बाजार में फिलहाल कई सब्जियां 40 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं।
महंगाई के कारण लोग जरूरत के मुताबिक थोड़ी-थोड़ी सब्जियां खरीदकर काम चला रहे हैं। पहले जिस थैले में 100 रुपये खर्च करने पर पर्याप्त सब्जियां आ जाती थीं, अब उसे भरने के लिए करीब 300 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
टमाटर 60 रुपये किलो, परवल 100 रुपये तक
रांची के बाजार में टमाटर की कीमत करीब 60 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है। फिलहाल स्थानीय किसानों के साथ बेंगलुरु से आने वाले टमाटर की आपूर्ति से बाजार की मांग पूरी की जा रही है। हालांकि, अगर स्थानीय टमाटर की आवक नहीं बढ़ी और बाहर से आपूर्ति प्रभावित रही, तो इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
वहीं, बाजार में फूलगोभी की आवक बढ़ने के बावजूद पटना से आने वाले परवल की मांग बनी हुई है। इसकी कीमत 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है। ऐसे में सब्जियां खरीदना आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है।
छठ के बाद मिल सकती है राहत
सब्जियों की कीमतों में नवंबर के बाद गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर छठ पर्व के बाद नई फसल बाजार में पहुंचने लगती है। आलू, मटर, गोभी और टमाटर जैसी सब्जियों की स्थानीय पैदावार बढ़ने से बाजार में आपूर्ति बेहतर हो सकती है।
आवक बढ़ने पर कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। हालांकि, फिलहाल त्योहारों के मौसम में महंगी सब्जियों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है।