भोजपुर/सहरसा/मुंगेर: बिहार के कई इलाकों में बाढ़ और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। भोजपुर में गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, वहीं सहरसा में कोसी नदी का कटाव लगातार जारी है। मुंगेर में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ और कटाव के बीच कहीं खेत जलमग्न हैं तो कहीं लोगों के घर नदी की धारा में समा रहे हैं।

भोजपुर में खतरे के निशान से ऊपर गंगा
भोजपुर के बड़हरा प्रखंड में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। नदी का पानी बढ़ने से प्रखंड के कई गांवों के आसपास के खेत और बधार जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों की सड़कों पर भी पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों के आवागमन में परेशानी हो रही है।
जल संसाधन विभाग के आशीष कुमार रंजन के अनुसार गंगा फिलहाल खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।
खेतों में पानी, किसानों की बढ़ी चिंता
बाढ़ का पानी मोहन करजा, बड़का लौहर, नेकनाम टोला, बखोरापुर, दुबे छपरा, हाजीपुर, शिवपुर, गुंडी और छोटका ईटहना सहित कई इलाकों के बधार तक पहुंच चुका है।
कई खेतों में लगी लौकी, नेनुआ, छिंगुनी, परवल, मकई और अन्य फसलें पानी की चपेट में हैं। फसल बर्बाद होने की आशंका से किसान परेशान हैं। वहीं खेत और बधार में पानी भरने के कारण पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट भी गहराने लगा है।
ग्रामीण सड़कों पर पानी, आवागमन प्रभावित
बाढ़ का असर अब ग्रामीण सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। लौहर-दुबे छपरा, लौहर-बखोरापुर और नेकनाम टोला-केशोपुर-सरैंया समेत कई ग्रामीण मार्गों पर पानी पहुंच गया है। इससे स्थानीय लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में पिछले कई दिनों से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, लेकिन नाव और जरूरी राहत सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
चार मेडिकल टीमें लगातार सक्रिय
बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मेडिकल टीमों को भी सक्रिय किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों को चिन्हित कर रही है।
बड़हरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक फिलहाल चार मेडिकल टीमें लगातार काम कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि मरीजों को समय पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।
सहरसा में कोसी का कटाव बना आफत
वहीं सहरसा में कोसी नदी का कटाव लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी की धारा कई घरों को अपने आगोश में ले चुकी है। दर्जनों परिवारों के घर अब भी कटाव के मुहाने पर हैं।
जिन परिवारों के घर और जमीन नदी में समा चुके हैं, वे अपना जरूरी सामान लेकर दूसरे लोगों के घरों या दरवाजों पर रहने को मजबूर हैं। विस्थापित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनके पास दोबारा घर बनाने के लिए जमीन तक नहीं बची है।
पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
स्थानीय मुखिया राम कुमार का आरोप है कि कटाव प्रभावित और विस्थापित परिवारों को बसाने के लिए अब तक सरकार की ओर से जमीन का पर्चा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
ग्रामीणों के अनुसार कटाव रोकने, प्रभावित परिवारों को राहत देने और स्थायी पुनर्वास की मांग को लेकर प्रखंड कार्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
गंगा-कोसी के बीच संकट में जिंदगी
बिहार के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ और कटाव ने एक बार फिर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है। कहीं पानी फसल और सड़कों को डुबो रहा है तो कहीं नदी का कटाव लोगों से उनका घर और जमीन छीन रहा है। ऐसे में प्रभावित परिवारों की नजर अब प्रशासन की राहत और पुनर्वास व्यवस्था पर टिकी है।