धनबाद: झारखंड में डॉक्टरों के 10 चिकित्सा संगठनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू करने की तैयारी है। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं जारी रहेंगी।
20 अक्टूबर तक काला बैज, 21 को सांकेतिक बहिष्कार
ज्वाइंट मेडिकल मूवमेंट के तहत होने वाले आंदोलन में सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों के साथ जूनियर डॉक्टर, मेडिकल छात्र और दंत चिकित्सक भी शामिल होंगे। आंदोलन के पहले चरण में 20 अक्टूबर तक डॉक्टर काला बैज लगाकर विरोध जताएंगे।
इसके बाद 21 अक्टूबर को सांकेतिक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू होगा। चिकित्सा संगठनों ने बुधवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर जल्द कार्रवाई की अपील की है।
डॉक्टरों की सुरक्षा और नियुक्ति प्रमुख मांग
चिकित्सा संगठनों ने अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा मजबूत करने की मांग की है। सरकारी डॉक्टरों को समय पर पदोन्नति, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति और भर्ती की समय-सारिणी जारी करने की मांग भी उठायी गयी है।
दंत चिकित्सकों के लिए डायनामिक एसीपी का लाभ, समयबद्ध पदोन्नति और नियमित बहाली की मांग भी की गयी है। संगठनों का कहना है कि खाली पदों पर नियुक्ति होने से स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर किया जा सकेगा।
आयुष्मान के बकाये भुगतान की भी मांग
निजी अस्पतालों के संगठनों ने आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के लंबित भुगतान का जल्द निबटारा करने की मांग की है। साथ ही क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के नियमों को व्यावहारिक बनाने और छोटे क्लीनिकों पर कागजी कार्रवाई का बोझ कम करने की मांग की गयी है।
संगठनों ने लाइसेंस और पंजीकरण के लिए सिंगल-विंडो व्यवस्था लागू करने, महिला डॉक्टरों की सुरक्षा, मेडिकल छात्रों के स्टाइपेंड का समय पर भुगतान और जूनियर डॉक्टरों की सेवा-शर्तों में सुधार की मांग भी रखी है।
डॉक्टर संगठनों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की समस्याओं का समाधान कर राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर बनाना है। आपातकालीन सेवाओं को आंदोलन से अलग रखा जाएगा।