रांची: झारखंड अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और पर्यटन क्षमता को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की तैयारी में है। इसी उद्देश्य से 8 और 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 में राज्य को पहली बार ‘Safe Monsoon Destination’ के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में पर्यटन, निवेश और ‘ब्रांड झारखंड – Vision 2050’ को लेकर व्यापक रणनीति पर चर्चा होगी।

राज्य सरकार का मानना है कि झारखंड की भौगोलिक बनावट इसे अन्य पर्वतीय राज्यों से अलग बनाती है। मानसून के दौरान यहां न बड़े पैमाने पर भूस्खलन की समस्या होती है और न ही विनाशकारी बाढ़ जैसी परिस्थितियां बनती हैं। यही वजह है कि सरकार अब झारखंड को देश के सबसे सुरक्षित मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल कराने की दिशा में काम कर रही है।
बैठक में झारखंड के झरनों, घने जंगलों, धार्मिक स्थलों, सांस्कृतिक विरासत और इको-टूरिज्म की संभावनाओं को राष्ट्रीय मंच पर रखा जाएगा। सरकार की कोशिश है कि देश-विदेश के निवेशकों और पर्यटकों के बीच झारखंड की नई ब्रांडिंग हो तथा पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिले।
पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा है कि मानसून के दौरान झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता अपने सर्वोत्तम रूप में दिखाई देती है। राज्य में मौजूद नेतरहाट, पतरातू घाटी, जोन्हा फॉल, दशम फॉल, सारंडा, देवघर और मलूटी जैसे पर्यटन स्थल देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं। सरकार इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं और आधुनिक पर्यटन अवसंरचना से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है।
सरकार का लक्ष्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ‘ब्रांड झारखंड’ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना है। यदि यह पहल सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में मानसून पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड देश के प्रमुख गंतव्यों में शामिल हो सकता है।