Shikhar Samvad

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का झारखंड से गहरा नाता चांडिल से सोरेन परिवार की मजबूत धुरी बनने तक का सफर…

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन का जीवन सिर्फ सोरेन परिवार तक सीमित नहीं था। उनका जुड़ाव झारखंड की मिट्टी, आदिवासी समाज और उस दौर के संघर्षों से भी गहराई से रहा। सरायकेला-खरसावां के चांडिल से शुरू हुई उनकी जीवन यात्रा आगे चलकर झारखंड के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवारों में से एक की मजबूत धुरी बन गई।

रूपी सोरेन, दिशोम गुरु और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शुमार शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी थीं। उन्होंने शिबू सोरेन के संघर्ष के दिनों को करीब से देखा और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपने बच्चों की परवरिश की। 7 अक्टूबर 2026 को लंबी बीमारी के बाद रांची में उनका निधन हो गया।

चांडिल से जुड़ी थीं रूपी सोरेन की जड़ें

रूपी सोरेन का मूल संबंध सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र से था। विवाह से पहले उनका नाम रूपी किस्कू था। आदिवासी समाज और अपनी जमीन से उनका गहरा जुड़ाव रहा।

चांडिल की इसी मिट्टी से निकलकर वह आगे चलकर सोरेन परिवार का हिस्सा बनीं। हालांकि उन्होंने खुद सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी, लेकिन परिवार के राजनीतिक और सामाजिक सफर को उन्होंने बेहद करीब से देखा।

1962 में शिबू सोरेन से हुआ विवाह

साल 1962 में रूपी किस्कू का विवाह शिबू सोरेन से हुआ। उस समय शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था। झारखंड के आदिवासी समाज के अधिकारों और अलग राज्य की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही थी।

शिबू सोरेन के राजनीतिक संघर्ष के दौरान घर-परिवार की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा रूपी सोरेन ने संभाला। एक तरफ पति झारखंड की लड़ाई में सक्रिय थे, तो दूसरी तरफ रूपी सोरेन परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां निभा रही थीं।

चार बच्चों की परवरिश में निभाई अहम भूमिका

रूपी सोरेन और शिबू सोरेन के चार बच्चे हुए—दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन और अंजनी सोरेन।

उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश बेहद सादगी और मजबूत संस्कारों के साथ की। परिवार ने अपने सफर में कई उतार-चढ़ाव देखे। बड़े बेटे दुर्गा सोरेन के निधन का दुख भी परिवार को झेलना पड़ा।

इसके बावजूद रूपी सोरेन परिवार को संभालने वाली मजबूत कड़ी बनी रहीं। बाद में हेमंत सोरेन के झारखंड की राजनीति में सक्रिय होने और मुख्यमंत्री बनने तक की यात्रा की भी वह साक्षी रहीं।

राजनीति में सक्रिय नहीं रहीं, लेकिन पूरा सफर करीब से देखा

रूपी सोरेन ने खुद कभी सक्रिय राजनीति में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई। लेकिन झारखंड आंदोलन से लेकर शिबू सोरेन के राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचने और फिर हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री बनने तक के पूरे राजनीतिक सफर को उन्होंने करीब से देखा।

सोरेन परिवार की राजनीतिक जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, लेकिन रूपी सोरेन की भूमिका घर और परिवार को संभालने वाली एक मजबूत महिला की रही।

शिबू सोरेन के निधन के बाद संभाली भावनात्मक जिम्मेदारी

4 अगस्त 2025 को शिबू सोरेन का निधन हो गया। पति के निधन के बाद रूपी सोरेन के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा और उनकी तबीयत लगातार खराब रहने लगी।

शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने के बाद रूपी सोरेन स्वयं राष्ट्रपति भवन पहुंचीं और यह सम्मान ग्रहण किया। यह क्षण उनके और पूरे सोरेन परिवार के लिए बेहद भावुक रहा।

बेटे हेमंत सोरेन के लिए भी मां का मजबूत सहारा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां के स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंतित रहते थे। उनके इलाज के लिए समय-समय पर उन्हें दिल्ली और हैदराबाद भी ले जाया जाता रहा।

सितंबर 2026 में सांस लेने में तकलीफ के बाद रूपी सोरेन को रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनके स्वास्थ्य में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा। गंभीर स्थिति में उन्हें कई बार वेंटिलेटर सपोर्ट भी दिया गया।

6 अक्टूबर को स्वास्थ्य में सुधार की खबर आई, लेकिन 7 अक्टूबर को अचानक उनकी तबीयत फिर बिगड़ गई। इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

चांडिल की बेटी से सोरेन परिवार की मजबूत धुरी तक

रूपी सोरेन का जीवन किसी राजनीतिक पद की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, परिवार, त्याग और मजबूत संस्कारों की कहानी रहा।

चांडिल की मिट्टी से जुड़ी एक साधारण आदिवासी महिला से लेकर शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां बनने तक का उनका सफर झारखंड के राजनीतिक इतिहास से जुड़ गया।

उन्होंने जिस दौर में अपने परिवार को संभाला, वह झारखंड आंदोलन और सोरेन परिवार के संघर्ष का दौर था। यही वजह है कि रूपी सोरेन की कहानी को सिर्फ एक राजनीतिक परिवार की मां के तौर पर नहीं, बल्कि झारखंड के एक लंबे सामाजिक और राजनीतिक सफर की साक्षी के रूप में भी याद किया जाएगा।

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