नई दिल्ली: प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-एजेएवाई) के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य बेहतर आजीविका, बुनियादी सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देना है।
पीएम-एजेवाई के तहत 18,093 गांवों को आदर्श ग्राम घोषित किया गया है। इससे अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और मूलभूत सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिली है। योजना के आदर्श ग्राम घटक के तहत अब तक 47.79 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं।
वहीं, वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच अनुदान-सहायता घटक के तहत राज्यों को 1,730 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस राशि का उपयोग अनुसूचित जाति समुदायों के विकास और आवश्यक सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी पहल
पीएम-एजेवाई के तहत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। अब तक 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इससे खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के अनुसूचित जाति छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं तक पहुंच बनाने में सहायता मिल रही है।
योजना के विभिन्न घटकों के माध्यम से सरकार का लक्ष्य अनुसूचित जाति समुदायों के लिए शिक्षा, रोजगार, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं के अवसरों को मजबूत करना है।
प्रमुख उपलब्धियां:
- 18,093 गांव आदर्श ग्राम घोषित किए गए हैं। इससे अनुसूचित जाति बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और मूलभूत सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिली है।
- 47.79 लाख से अधिक नागरिक लाभान्वित हुए हैं। ये लाभार्थी आदर्श ग्राम घटक के तहत योजना से जुड़े हैं।
- ₹1,730 करोड़ जारी किए गए। वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक अनुदान-सहायता घटक के तहत राज्यों को यह राशि जारी की गई।
- 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा किया गया है। इससे खासकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के अनुसूचित जाति छात्रों को शिक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
- शिक्षा और आजीविका पर जोर: योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति समुदायों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर उनके सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक विकास को गति देना है।
स्रोत्र – पीआईबी