नई दिल्ली/रांची: बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर करीब 25 वर्षों से चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया है। सोमवार को नई दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत केंद्र और दोनों राज्यों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

झारखंड को 2.00 MAF, बिहार के हिस्से में 5.75 MAF पानी
समझौते के तहत सोन नदी के कुल 7.75 मिलियन एकड़-फीट (MAF) जल में से बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी आवंटित किया गया है। लंबे समय से लंबित जल बंटवारे का मुद्दा सुलझने के बाद दोनों राज्यों में सिंचाई और पेयजल से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
पलामू-गढ़वा समेत इन इलाकों को फायदा
सोन नदी के पानी में झारखंड का हिस्सा तय होने से पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। इन इलाकों में जल संसाधन की उपलब्धता बढ़ने से कृषि गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है। वहीं बिहार के बड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में इस समझौते के उपयोगी होने की उम्मीद जताई गई है।
अमित शाह ने बताया ‘टीम भारत’ और सहकारी संघवाद का उदाहरण
समझौते के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘टीम भारत’ की सोच और सहकारी संघवाद का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों के एक टीम के रूप में आगे बढ़ने से लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान संभव है। केंद्र सरकार के अनुसार, यह समझौता पूर्वी भारत के एक लंबे समय से लंबित जल विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हेमंत सोरेन ने जताया आभार
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोन नदी के जल बंटवारे के मुद्दे के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया। उन्होंने समझौते को झारखंड के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि इससे राज्य के संबंधित क्षेत्रों में जल उपलब्धता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
समझौते के दौरान केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, झारखंड के जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन, झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार, नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन के रेजिडेंट कमिश्नर अरवा राजकमल समेत केंद्र और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
करीब ढाई दशक से लंबित इस विवाद के समाधान को बिहार और झारखंड के बीच जल संसाधन प्रबंधन और अंतरराज्यीय सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।