पटना: बिहार में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। लगातार हो रही बारिश से जहां किसानों के चेहरे खिल उठे हैं, वहीं राजधानी पटना समेत कई शहरों में जलजमाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने राज्य के 10 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले 24 घंटों तक राज्यभर में बादल छाए रहेंगे और रुक-रुक कर बारिश होती रहेगी। अररिया, भोजपुर, बक्सर, कटिहार, किशनगंज, सारण और सिवान में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं समस्तीपुर, वैशाली और पश्चिम चंपारण में अति भारी वर्षा को लेकर विशेष अलर्ट जारी किया गया है।

अगले 48 घंटे में और गिरेगा तापमान
मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 घंटों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। पटना का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि राज्य में सबसे अधिक तापमान सुपौल में 35.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने से अगले तीन से चार दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

पटना समेत कई शहरों में जलजमाव
सावन की पहली सोमवारी पर हुई तेज बारिश के बाद पटना, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सुपौल और सहरसा समेत कई शहरों में जलजमाव की स्थिति बन गई। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। राज्य के 25 जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं भी चलीं।

कई जिलों में रिकॉर्ड बारिश
बीते 24 घंटों में सारण के अमनौर में सबसे अधिक 98 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा पूर्णिया के गौरा में 92 मिमी, कस्बा में 72 मिमी, सीतामढ़ी के सोनबरसा में 60 मिमी, रोहतास के तिलौथू में 59 मिमी और सिवान के भगवानपुर हाट में 53 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। वहीं कटिहार, मधेपुरा, सुपौल, बांका, सहरसा, औरंगाबाद और पुनपुन में भी अच्छी बारिश हुई।
सहरसा में खुली जल निकासी व्यवस्था की पोल
लगातार बारिश के बाद सहरसा के कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। वार्ड-39, गांधी पथ, पुरानी जेल एरिया, न्यू कॉलोनी, सराही, हाथी टोला और मीर टोला सहित कई मोहल्लों में जलजमाव से लोगों की परेशानी बढ़ गई। स्थानीय लोगों ने मच्छरों के बढ़ते प्रकोप और संक्रामक बीमारियों के खतरे को लेकर चिंता जताई है। नगर निगम का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर जल निकासी का कार्य कराया जा रहा है।