Shikhar Samvad

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हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल गिरा छह मजदूरों की मौत सीएम योगी सख्त जांच के आदेश

बेतवा नदी पर बन रहे पुल का हिस्सा ढहा, कई मजदूर मलबे में दबे

हमीरपुर: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में शुक्रवार तड़के बड़ा हादसा हो गया। बेतवा नदी पर बन रहे निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में मलबे में दबकर 6 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई मजदूर घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

बताया जा रहा है कि हादसे के समय मजदूर पुल के नीचे सो रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी और तूफान के बीच पुल का हिस्सा अचानक ढह गया। सूचना मिलते ही SDRF, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

मुख्यमंत्री योगी ने की मुआवजे की घोषणा

हादसे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

सीएम योगी ने मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए सहायक अभियंता गजेंद्र कुमार चौधरी को निलंबित कर दिया है। वहीं डीपीएम दिलीप कुमार के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि हादसे के लिए जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

बांदा और हमीरपुर के मजदूरों की गई जान

हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में बांदा और हमीरपुर जिले के श्रमिक शामिल हैं।

मृतकों के नाम:

  • लोकेन्द्र निषाद, बांदा
  • सावंत यादव, बांदा
  • सभाजीत, बांदा
  • पुष्पेंद्र सिंह चौहान, हमीरपुर
  • राजेश पाल, हमीरपुर

मलबे में फंसे मजदूर:

  • अवधेश निषाद
  • कल्लू यादव
  • राजेश निषाद

92 करोड़ की लागत से बन रहा था पुल

यह पुल कुरारा क्षेत्र में मोरकंदर परसानी से नैथी गांव के बीच बनाया जा रहा था। करीब 700 मीटर लंबे इस पुल की लागत लगभग 92 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह परियोजना राज्यसभा सांसद Baburam Nishad के प्रयासों से शुरू हुई थी।

पुल गिरने की वजह पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तेज आंधी-तूफान की वजह से पुल ढह गया। हालांकि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में लापरवाही को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।

सांसद बाबूराम निषाद के बयान पर विवाद

घटनास्थल पर पहुंचे राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद का बयान भी चर्चा में आ गया है। उन्होंने ठेकेदार की कार्यशैली पर सवाल उठाने से इनकार करते हुए कहा कि निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा था और तय समयसीमा के भीतर काम पूरा होना था।

सांसद के इस बयान को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले ही ठेकेदार को क्लीन चिट देना संवेदनहीनता दर्शाता है।

फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस मलबे में दबे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने और हादसे के कारणों की जांच पर है।

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