Shikhar Samvad

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देवास में पटाखा फैक्ट्री में धमाका तीन मौत तेईस घायल कई मजदूर अब भी लापता

20 फीट दूर तक बिखरे शवों के टुकड़े, केमिकल मिलाने के दौरान हुआ भीषण विस्फोट

अवैध संचालन की आशंका, सुरक्षा मानकों पर फिर उठे सवाल

देवास पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, कई मजदूरों की मौत; सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल

मध्य प्रदेश: टोंक कल्याण में गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे एक पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में कम से कम 2 से 3 मजदूरों की मौत की बात सामने आ रही है लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जबकि 23 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि मृतकों की संख्या 8 से 10 तक हो सकती है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाका इतना जोरदार था कि शवों के टुकड़े 20 से 25 फीट दूर तक जा गिरे। फैक्ट्री में काम कर रहे कई मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। तीन महिलाओं के लापता होने की भी सूचना है। बताया जा रहा है कि इस यूनिट में बड़ी संख्या में महिला मजदूर कार्यरत थीं।

केमिकल मिलाने के दौरान हुआ विस्फोट

स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री में दो रासायनिक पदार्थों को मिलाकर बारूद तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान रासायनिक संतुलन बिगड़ गया और तेज धमाका हुआ। जिस शेड में विस्फोट हुआ वहां 15 से 20 मजदूर काम कर रहे थे। हादसा लंच ब्रेक से कुछ मिनट पहले हुआ, जिससे फैक्ट्री में अफरातफरी मच गई।

प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गई। घायलों को देवास और इंदौर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।हालांकि जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन हादसे को लेकर तीखे सवाल उठ रहे है कि

क्या पटाखा फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था और उसकी शर्तों का पालन किया जा रहा था?

यदि फैक्ट्री में 200 से अधिक मजदूर काम कर रहे थे, तो सुरक्षा मानकों की नियमित जांच किसने की?

केमिकल मिलाने जैसे अत्यंत जोखिमपूर्ण काम के दौरान पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और प्रशिक्षित सुपरवाइजर क्यों मौजूद नहीं थे?

क्या फैक्ट्री में अनुमत सीमा से अधिक बारूद और रसायनों का भंडारण किया गया था?

स्थानीय प्रशासन और विस्फोटक विभाग ने आखिरी निरीक्षण कब किया था?

क्या महिलाओं और मजदूरों को बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के खतरनाक कार्य में लगाया गया था?

अगर पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं, तो सुरक्षा नियमों के पालन में बार-बार चूक क्यों हो रही है?

क्या यह हादसा लापरवाही का नतीजा है या अवैध संचालन का मामला?

जिम्मेदार अधिकारियों और फैक्ट्री संचालकों पर कब तक सख्त आपराधिक कार्रवाई होगी?

हर हादसे के बाद जांच और मुआवजे की घोषणा होती है, लेकिन ऐसी घटनाएं रुक क्यों नहीं रहीं?

पहले भी हो चुके हैं बड़े पटाखा फैक्ट्री हादसे

हरदा ब्लास्ट (6 फरवरी 2024)

11 लोगों की मौत, 170 से अधिक घायल।

जांच में सामने आया कि यूनिट के पास वैध लाइसेंस नहीं था या लाइसेंस संबंधी गंभीर अनियमितताएं थीं।

फैक्ट्री मालिकों और प्रबंधकों के खिलाफ FIR दर्ज।

एक्सप्लोसिव एक्ट , आईपीसी, बी एन एस की धाराओं के तहत गिरफ्तारी।

संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई भी हुई।

विरुधुनगर हादसा (अप्रैल 2026)

18 मजदूरों की मौत, 6 घायल।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया।

राज्य सरकार से जांच रिपोर्ट और मुआवजा विवरण मांगा गया।

काकीनाडा हादसा (फरवरी 2026)

20 से अधिक मजदूरों की मौत।

आरोप: लाइसेंस सीमा से अधिक विस्फोटक भंडारण और अनुमत संख्या से ज्यादा श्रमिक।

पुलिस जांच और आपराधिक कार्रवाई शुरू।

कौशांबी हादसा (2024)

कई लोगों की मौत।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लिया।

प्रदूषण एवं सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की जांच हुई।

आइए जानते है ऐसे मामलों में आमतौर पर कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई होती है?

पटाखा फैक्ट्री हादसों में आमतौर पर निम्न कार्रवाई की जाती है:

फैक्ट्री सील करना

लाइसेंस निलंबित या रद्द करना

मालिक, प्रबंधक और सुपरवाइजर पर FIR

एक्सप्लोसिव एक्ट 1884 और एक्सप्लोसिव रूल्स 2008 के तहत कार्रवाई

फैक्ट्री एक्ट 1948 के तहत मुकदमा

लापरवाही से मौत (BNS धारा 106) के तहत आपराधिक मामला

मृतकों के परिजनों को मुआवजा

NHRC/NGT या न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान

क्यों नहीं रुक रहे पटाखा फैक्ट्री हादसे?

विशेषज्ञों के अनुसार प्रमुख कारण हैं:

लाइसेंस शर्तों का उल्लंघन

क्षमता से अधिक बारूद का भंडारण

प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की कमी

महिलाओं और दिहाड़ी मजदूरों से जोखिमपूर्ण कार्य

नियमित निरीक्षण में लापरवाही

अवैध या अर्ध-कानूनी इकाइयों का संचालन

निष्कर्ष

देवास का हादसा एक बार फिर दिखाता है कि विस्फोटक उद्योग में छोटी सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है। हर्दा, विरुधुनगर, काकीनाडा और कौशांबी जैसे मामलों के बावजूद यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि श्रमिकों की जिंदगी के साथ गंभीर लापरवाही है। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि देवास की फैक्ट्री वैध रूप से संचालित हो रही थी या नहीं और जिम्मेदारों पर कितनी कठोर कार्रवाई होती है।

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