रांची: जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली, रांची के लिए यह अत्यंत गर्व और प्रेरणा का क्षण है कि विद्यालय के नन्हे विद्यार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए न केवल स्कूल, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। आज जब खेलों की चर्चा अक्सर क्रिकेट तक सीमित रह जाती है, ऐसे समय में इन बच्चों की उपलब्धियाँ यह साबित करती हैं कि नई पीढ़ी की रुचि अब विविध खेलों और साहसिक गतिविधियों की ओर तेजी से बढ़ रही है।

नन्ही उम्र, बड़े कारनामे: बच्चों ने खेलों की दुनिया में बदली सोच
इसी कड़ी में, कक्षा III-B के छात्र शौर्य सिंह ने ग्रीस के एथेंस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वुशु प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक हासिल किया। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह दर्शाती है कि मार्शल आर्ट जैसे खेलों में भी भारतीय बच्चे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। वहीं, विद्यालय के मात्र 7 वर्षीय छात्र ईशांक सिंह ने तो एक ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने श्रीलंका के तलाइमन्नार से भारत के धनुषकोडी (अरिचलमुन्नई) तक लगभग 29-30 किलोमीटर लंबे चुनौतीपूर्ण पाक जलडमरूमध्य को मात्र 9 घंटे 50 मिनट में तैरकर पार कर इतिहास रच दिया।

रांची के दो होनहारों ने किया कमाल—एक ने किया समंदर पार , दूसरे ने जीता इंटरनेशनल मेडल
इस अद्वितीय उपलब्धि के लिए ईशांक को Universal Records Forum (URF World Records) द्वारा “The Youngest and Fastest Palk Strait Swimmer” का खिताब दिया गया है। साथ ही Open Water Swimming Academy, Theni (Tamil Nadu) ने भी उन्हें 2026 OWSAT World Record से सम्मानित किया है।ईशांक की यह सफलता कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और अदम्य साहस का परिणाम है। उन्होंने अपने प्रशिक्षकों अमन कुमार जायसवाल और बजरंग कुमार के मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य बी.एन. झा ने कहा,“इतनी कम आयु में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस प्रकार की उपलब्धि हासिल करना असाधारण है। यह न केवल हमारे विद्यालय बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। ईशांक और शौर्य ने यह साबित कर दिया है कि समर्पण और सही दिशा मिलने पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।”विद्यालय प्रबंधन समिति की उपाध्यक्ष एम. एम. दासगुप्ता ने भी दोनों छात्रों की उपलब्धियों को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि यह सफलता अन्य विद्यार्थियों को भी नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी।इन दोनों उपलब्धियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज के बच्चे पारंपरिक खेलों की सीमाओं से आगे बढ़कर वुशु, ओपन वॉटर स्विमिंग जैसे विविध और चुनौतीपूर्ण खेलों में अपनी पहचान बना रहे हैं।

यह बदलता रुझान न केवल खेल संस्कृति को समृद्ध कर रहा है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और साहस को भी मजबूत कर रहा है।जवाहर विद्या मंदिर, श्यामली का पूरा परिवार इन दोनों होनहार विद्यार्थियों पर गर्व करता है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है। साथ ही, यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि इनकी सफलता से प्रेरित होकर और भी बच्चे अपने सपनों को नई उड़ान देंगे।