पटना: बिहार में ग्रामीण सड़कों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में ग्रामीण कार्य विभाग ने बड़ा अभियान शुरू किया है। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए विभाग ने ग्रामीण सड़कों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान का काम तेज कर दिया है। इसके तहत ऐसे स्थानों पर शत-प्रतिशत रेट्रो-रिफ्लेक्टिव ट्रैफिक साइन लगाए जाएंगे, जहां लाइन ऑफ साइट बाधित होती है और हादसों की आशंका अधिक रहती है।

ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव दिवेश सेहरा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ग्रामीण पथों पर जेब्रा क्रॉसिंग, गांव के नाम वाले बोर्ड, किलोमीटर स्टोन और 200 मीटर स्टोन हर हाल में लगाए जाएं। विभाग का मानना है कि बेहतर संकेतक और सड़क सुरक्षा उपायों से ग्रामीण इलाकों में दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
बैठक में विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले संवेदकों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया। दिसंबर 2025 से अब तक की निविदाओं की समीक्षा में जिन एजेंसियों के दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं या जिन्होंने एलओए मिलने के बावजूद एकरारनामा नहीं किया, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है।
ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने क्वालिटी कंट्रोल सेल को पुनर्गठित करने का फैसला लिया है। इसके तहत परमानेंट फ्लाइंग स्क्वॉड का गठन किया जाएगा और क्षेत्रीय व मुख्यालय स्तर की प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि खराब गुणवत्ता वाले कार्यों में परफॉर्मेंस सिक्योरिटी लौटाने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी।

विभाग ने सभी पथों के सूचना पट्टों पर “हमारा बिहार हमारी सड़क” ऐप की जानकारी 31 मई तक अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने का निर्देश दिया है, ताकि आम लोग भी सड़क निर्माण और गुणवत्ता की निगरानी में भागीदारी कर सकें।
इसके अलावा सात निश्चय-3 और ग्रामीण सड़क सुदृढ़ीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत ग्रामीण सड़कों की चौड़ाई 3.75 मीटर से बढ़ाकर 5.5 मीटर करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इसके लिए विभाग ने 15 मई तक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का लक्ष्य तय किया है।