रांची/देवघर: संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगलमय भविष्य की कामना का पर्व जिउतिया शुक्रवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। देवघर से लेकर साहिबगंज तक पर्व को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिला। माताओं ने स्नान कर पूजा-अर्चना की और व्रत की तैयारियां शुरू कीं।
तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय के बाद निर्जला व्रत और फिर पारण की परंपरा है। देवघर में बाबा धाम परिसर से लेकर बाजारों तक जिउतिया की रौनक नजर आई। महिलाओं ने पूजा सामग्री, सब्जियों और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी की।
राजा जीमूतवाहन के त्याग से जुड़ी है कथा
जिउतिया पर्व की पौराणिक कथा राजा जीमूतवाहन के त्याग और करुणा से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, राजा जीमूतवाहन ने एक मां के पुत्र को गरुड़ से बचाने के लिए स्वयं को उनके सामने समर्पित कर दिया था। राजा के त्याग और करुणा से प्रभावित होकर गरुड़ ने उन्हें जीवनदान दिया और आशीर्वाद दिया।
इसी कथा के आधार पर जिउतिया व्रत को संतान की दीर्घायु और सुखी जीवन की कामना से जोड़ा जाता है। माताएं श्रद्धा के साथ यह व्रत रखती हैं।
जिउतिया की खरीदारी से बाजार गुलजार
पर्व को लेकर देवघर के बाजारों में भीड़ बढ़ गई है। व्रत में इस्तेमाल होने वाली सब्जियों और अन्य सामग्रियों की मांग बढ़ने से कीमतों में भी उछाल देखा गया। सतपथु और झिंगली जैसी सब्जियों की कीमतें सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ गई हैं। वहीं, मछली बाजार में भी सुबह से खरीदारों की भीड़ देखने को मिली।
साहिबगंज में गंगा घाट पर पहुंचीं महिलाएं
साहिबगंज के मुक्तेश्वर गंगा घाट पर भी जिउतिया के पहले दिन महिलाओं ने स्नान किया। गंगा स्नान के बाद महिलाएं गंगाजल लेकर घर पहुंचीं और पर्व की परंपरा के अनुसार भोजन तैयार किया। व्रती महिलाओं ने बताया कि यह व्रत बेटे और बेटी दोनों की दीर्घायु और मंगल की कामना के लिए किया जाता है।