बिहार: बिहार में बाढ़ के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। गंगा, गंडक, कोसी और सोन समेत कई नदियों के उफान से निचले इलाकों में पानी भर गया, जिससे लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। अब बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के बाद सरकार ने इससे हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है।
ग्रामीण कार्य विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 17 बाढ़ प्रभावित जिलों में 1050 से अधिक ग्रामीण सड़कें डूब गईं या क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। विभाग ने प्रारंभिक अनुमान के आधार पर सड़क मरम्मत पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई है।
17 जिलों की सड़कों को हुआ नुकसान
ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से जिलों से बाढ़ के कारण प्रभावित सड़कों की रिपोर्ट मांगी गई थी। इसके बाद अलग-अलग जिलों से आंकड़े भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट में पटना से भागलपुर तक कई जिलों में ग्रामीण सड़कों के डूबने और क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।
विभाग के अनुसार, सड़कों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन पानी पूरी तरह उतरने के बाद ही हो सकेगा। इसके बाद सड़क के किस हिस्से में कितनी क्षति हुई है, इसकी विस्तृत जानकारी मिल पाएगी।
पानी निकलने के बाद शुरू होगी मरम्मत
ग्रामीण कार्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकलने की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया है। विभाग के अनुसार, पानी पूरी तरह उतरने के बाद क्षतिग्रस्त सड़कों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा और जरूरत के अनुसार मरम्मत का काम शुरू किया जाएगा।
फिलहाल विभाग का ध्यान प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क बहाल करने और बाढ़ के कारण हुए नुकसान का आकलन करने पर है। सड़कों की वास्तविक क्षति और मरम्मत की लागत का अंतिम आंकड़ा विस्तृत सर्वेक्षण के बाद सामने आने की उम्मीद है।