रांची : रांची में आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान शुरू
सिविल सर्जन सभागार में हुआ कार्यक्रम, अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने दिलाई आत्महत्या रोकथाम की शपथ; स्वास्थ्यकर्मियों और एएनएमटीसी छात्राओं ने निकाली जागरूकता रैली
आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर रांची में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान की शुरुआत हुई। सिविल सर्जन सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों एवं कर्मचारियों को आत्महत्या रोकथाम के प्रति संवेदनशील रहने और मानसिक संकट से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए तत्पर रहने की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम के बाद स्वास्थ्यकर्मियों एवं एएनएमटीसी की छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली। रैली के माध्यम से लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने, परेशानियों को साझा करने और संकट की स्थिति में समय पर मदद लेने का संदेश दिया गया।
पॉइंटर्स:
- रांची में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम
- अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने किया कार्यक्रम का शुभारंभ
- स्वास्थ्यकर्मियों को दिलाई आत्महत्या रोकथाम की शपथ
- एएनएमटीसी छात्राओं और स्वास्थ्यकर्मियों ने निकाली जागरूकता रैली
- 10 से 16 सितंबर तक स्कूल-कॉलेजों में चलेगा विशेष अभियान
- मानसिक परेशानी में अकेले न रहें, परिवार-मित्रों से करें बातचीत
- टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर ली जा सकती है मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता
“चुप्पी को बातचीत और निराशा को आशा में बदलना होगा”
अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि “चुप्पी को बातचीत में बदलना होगा और निराशा को आशा में बदलने का प्रयास करना होगा।”
उन्होंने कहा कि अत्यधिक गुस्सा, चिंता और असंतोष मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में व्यक्ति को अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय परिवार, दोस्तों या चिकित्सक के साथ साझा करना चाहिए। मानसिक तनाव या परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को अकेले संघर्ष नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में एक-दूसरे से खुलकर बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता लेना आत्महत्या के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
परेशानियों को साझा करना जरूरी: डॉ. सीमा गुप्ता
जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता ने कहा कि अपनी परेशानियों और भावनाओं को दूसरों से साझा नहीं करना मानसिक परेशानी और आत्महत्या की प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति के साथ सहज महसूस हो, उसके साथ अपनी परेशानियां साझा करनी चाहिए। इससे समय रहते भावनात्मक सहयोग और आवश्यक मदद मिल सकती है।
डॉ. गुप्ता ने सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल को भी मानसिक तनाव का एक कारण बताते हुए इसके संतुलित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, निराशा, सामाजिक दूरी, लगातार तनाव या असामान्य भावनात्मक व्यवहार जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
सकारात्मक व्यवहार और स्वस्थ जीवनशैली पर जोर
चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ए.आर. मुस्ताफी ने कहा कि जीवन में नकारात्मक परिस्थितियां आना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे निपटने के लिए सकारात्मक व्यवहार बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अवसाद की स्थिति में व्यक्ति के व्यवहार और दैनिक गतिविधियों में बदलाव दिखाई दे सकता है। व्यक्ति लगातार उदास रह सकता है, दोस्तों और परिवार से दूरी बनाने लगता है तथा पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में उसकी रुचि कम हो सकती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते समझना चाहिए और जरूरत पड़ने पर करीबी लोगों तथा विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।
स्कूल-कॉलेजों में 16 सितंबर तक चलेगा अभियान
जिले में 10 से 16 सितंबर 2026 तक विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान के दौरान विद्यार्थियों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक सहयोग, आत्महत्या के चेतावनी संकेत और समय पर सहायता लेने के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी।
अभियान के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया जाएगा कि मानसिक परेशानी की स्थिति में खुद को अकेला न करें। परिवार, मित्र, शिक्षक या स्वास्थ्यकर्मी से बातचीत करें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सहायता लें।
14416 पर मिलेगी मानसिक स्वास्थ्य सहायता
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।
यह कार्यक्रम सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद के दिशा-निर्देश में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. सीमा गुप्ता, चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. ए.आर. मुस्ताफी, डॉ. दीपशिखा, डॉ. वीणा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रवीण कुमार सिंह सहित अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
WHO के अनुसार, दुनिया में हर साल लगभग 7 लाख 20 हजार से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं और 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं में यह मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है।