रांची/पटना: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने झारखंड के किसानों के लिए खरीफ मौसम को लेकर महत्वपूर्ण कृषि परामर्श जारी किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रांची केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार जुलाई में राज्य के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा और सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। ऐसे में खरीफ फसलों पर सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

ICAR ने किसानों को कम अवधि वाली और सूखा सहनशील धान की किस्में अपनाने की सलाह दी है। साथ ही जल की कमी वाले क्षेत्रों में मक्का, अरहर, मूंगफली, रागी, उड़द, तिल, सोयाबीन और अन्य मोटे अनाज जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करने की अनुशंसा की गई है। किसानों को अंतरवर्तीय खेती अपनाने, सीधी बुवाई वाली धान (Direct Seeded Rice) को बढ़ावा देने तथा सामुदायिक नर्सरी तैयार करने की भी सलाह दी गई है।
एडवाइजरी में बेहतर अंकुरण के लिए बीज प्राइमिंग, बीज उपचार और जैव उर्वरकों के उपयोग पर जोर दिया गया है। वहीं जल संरक्षण के लिए खेत की मेड़ों की मरम्मत, वर्षा जल संचयन, मल्चिंग और नमी संरक्षण के उपाय अपनाने को कहा गया है।
पोषक तत्व प्रबंधन के तहत किसानों को नाइट्रोजन उर्वरक को 3–4 किस्तों में देने, नीम-लेपित यूरिया का उपयोग करने तथा सूखी मिट्टी में यूरिया का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित खरपतवारनाशियों और यांत्रिक निराई (कोनो-वीडर) के उपयोग की भी सिफारिश की गई है।
ICAR ने कहा है कि समय रहते इन वैज्ञानिक कृषि उपायों को अपनाकर किसान एल नीनो की संभावित परिस्थितियों में भी खरीफ फसलों के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं और उत्पादन को सुरक्षित रख सकते हैं।