रांची: हूल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को रांची के मोरहाबादी स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विधायक कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहीं।

‘हूल विद्रोह शोषण के खिलाफ सबसे बड़ा प्रतिरोध था’
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 30 जून झारखंड और देश के इतिहास का गौरवशाली दिन है। जब समाज शोषण और अन्याय से जूझ रहा था, तब सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत और अत्याचार के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका।
‘क्रांति की चिंगारी कभी नहीं बुझती’
मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्याय और शोषण के खिलाफ उठी आवाज कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि क्रांति की चिंगारी सदैव जलती रहती है और यही समाज को बदलाव की प्रेरणा देती है। उन्होंने दिल्ली के राजघाट और इंडिया गेट पर जलने वाली अमर ज्योति का उदाहरण देते हुए कहा कि वीरों का बलिदान हमेशा राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।

वीरों की धरती है झारखंड
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके वीर सपूतों के बलिदान से है। राज्य के महान क्रांतिकारियों ने अन्याय के खिलाफ संघर्ष का जो इतिहास रचा, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने सभी लोगों से महापुरुषों के आदर्शों पर चलने और सामाजिक न्याय के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।