रांची: रिम्स (RIMS) के निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे के बाद झारखंड की राजनीति और स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सक्षम अनुसूचित वर्ग के चिकित्सक को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उन्हें पद छोड़ना पड़ा।

सरयू राय ने कहा कि रिम्स की गवर्निंग बॉडी की पहली बैठक से ही डॉ. राजकुमार के खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाया गया। उनका दावा है कि स्वास्थ्य विभाग ने उनके खिलाफ कई प्रशासनिक कदम उठाए, जिनमें से कुछ पर पहले ही उच्च न्यायालय रोक लगा चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद विभाग ने सीआईडी जांच का सहारा लिया और डॉ. राजकुमार से करीब आठ घंटे तक पूछताछ की गई। हालांकि, इस जांच में कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया।
सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. राजकुमार द्वारा 8 जून को स्वास्थ्य मंत्री को लिखे गए पत्र का उल्लेख किया, जिसमें 22 बिंदुओं के जरिए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
इन आरोपों में गवर्निंग बॉडी की अनदेखी, नीतिगत फैसलों में पारदर्शिता की कमी, व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना से कार्रवाई और संस्थान के सुचारु संचालन में बाधा उत्पन्न करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सरयू राय ने कहा कि यदि इन आरोपों की जांच में सच्चाई सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से राज्य के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों की छवि प्रभावित होती है और ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल टूटता है।