झारखंड की बेटी का राष्ट्रीय स्तर पर जलवा, AITA चैंपियन बनी कायना
कोर्ट पर कायना का कमाल, बिना सेट गंवाए जीता राष्ट्रीय खिताब
JVM श्यामली की छात्रा ने बढ़ाया राज्य का मान, बनी नेशनल चैंपियन
नन्हे हाथों में राष्ट्रीय ट्रॉफी, टेनिस में चमका झारखंड का भविष्य
टेनिस के आसमान में चमका झारखंड का नया सितारा, 8 साल की कायना ने जीता राष्ट्रीय खिताब

रांची। प्रतिभा जब मेहनत का साथ पाती है, तो उम्र मायने नहीं रखती। झारखंड की नन्ही टेनिस खिलाड़ी और JVM श्यामली की कक्षा 3-बी की छात्रा कायना कृष्णा सहाय ने ऐसा ही कर दिखाया है। महज कम उम्र में उन्होंने AITA अंडर-10 राष्ट्रीय टेनिस प्रतियोगिता का खिताब जीतकर झारखंड का नाम पूरे देश में रोशन कर दिया है।
भुवनेश्वर में 19 से 21 जून के बीच आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, लेकिन कोर्ट पर कायना का आत्मविश्वास, फुर्ती और शानदार खेल सभी पर भारी पड़ा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में एक भी सेट गंवाए बिना खिताब अपने नाम किया। फाइनल सहित सभी मुकाबलों में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।
झारखंड की नंबर-1 खिलाड़ी ने दिखाया दम

अंडर-10 श्रेणी में झारखंड की नंबर-1 रैंकिंग खिलाड़ी कायना ने प्रतियोगिता में अपने खेल का ऐसा स्तर दिखाया कि प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के लिए उन्हें रोकना मुश्किल हो गया। उनकी एकाग्रता, सटीक शॉट्स और जीत की भूख ने उन्हें अपने जीवन का पहला राष्ट्रीय खिताब दिलाया।
JVM श्यामली में हुआ भव्य सम्मान
राष्ट्रीय जीत के बाद JVM श्यामली में आयोजित प्रार्थना सभा में कायना का विशेष सम्मान किया गया। विद्यालय के प्राचार्य बी.एन. झा, उप प्राचार्या अनुपमा श्रीवास्तव और प्रभाग प्रभारी दीपक कुमार सिन्हा ने उन्हें ट्रॉफी, मेडल और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार ने कायना की उपलब्धि को पूरे संस्थान के लिए गौरव का क्षण बताया।
“खेल चरित्र निर्माण का माध्यम”

प्राचार्य बी.एन. झा ने कहा कि JVM श्यामली हमेशा से शिक्षा के साथ खेल प्रतिभाओं को भी बराबर महत्व देता रहा है। खेल केवल जीत-हार का नाम नहीं, बल्कि अनुशासन, संघर्ष और चरित्र निर्माण का माध्यम है। उन्होंने विश्वास जताया कि कायना आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी झारखंड और देश का नाम रोशन करेंगी।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
मोबाइल और डिजिटल दुनिया के दौर में कायना कृष्णा सहाय की सफलता यह संदेश देती है कि समर्पण, अनुशासन और लगातार अभ्यास से किसी भी उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनकी यह जीत न सिर्फ झारखंड के खेल जगत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा भी है, जो बड़े सपने देखते हैं।