रांची: झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में एक बार फिर घुसपैठ और जनसंख्या बदलाव का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने दावा किया है कि क्षेत्र के कई जिलों में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के कारण डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है, जिससे आदिवासी पहचान और सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

राजमहल के पूर्व विधायक अनंत ओझा ने साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा, जामताड़ा, दुमका और देवघर जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में वर्षों से अवैध घुसपैठ होती रही है। उनका आरोप है कि पश्चिम बंगाल की सीमाओं और गंगा के जलमार्गों का इस्तेमाल कर घुसपैठिए संथाल परगना तक पहुंचे और धीरे-धीरे यहां की जनसंख्या संरचना में बदलाव आया।
जनगणना के आंकड़ों का हवाला
बीजेपी नेताओं का दावा है कि वर्ष 1951 में संथाल परगना क्षेत्र में आदिवासी आबादी 44.67 प्रतिशत थी, जो 2011 तक घटकर 28.11 प्रतिशत रह गई। वहीं मुस्लिम आबादी 9.44 प्रतिशत से बढ़कर 22.73 प्रतिशत तक पहुंच गई। पार्टी का कहना है कि इन आंकड़ों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
आदिवासी पहचान पर चिंता
अनंत ओझा ने कहा कि यह सिर्फ जनसंख्या वृद्धि का मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक संरचना और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। बीजेपी का आरोप है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
सियासी बहस तेज
संथाल परगना में डेमोग्राफी को लेकर उठे इस मुद्दे ने झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर बीजेपी घुसपैठ और जनसंख्या बदलाव के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन दावों की सत्यता और आंकड़ों की व्याख्या को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।